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कोहली से दूर रह गया यह महान कीर्तिमान

Mon, 07 Apr 2014 10:30 AM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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ताज्जुब की बात है कि अभी तक टीम इंडिया ने जितनी महान जीतें दर्ज की हैं, उन सभी मैचों में दिल्ली के क्रिकेटरों में मेन रोल प्ले किया है। रविवार को अगर एक बार और टीम इंडिया ने जीत दर्ज की होती तो कोहली उस कीर्तिमान का हिस्सा बन जाते जिसकी शुरुआत 1983 वर्ल्ड कप फाइनल में दिल्ली के मशहूर ऑल राउंडर मोहिंदर अमरनाथ ने की थी।
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यही नहीं कोहली ने इसका पूरा प्रयास भी किया कि वह उस क्लब में शामिल हो जाएं और वह कीर्तिमान बनाए, जिसके तहत कहा जाता है कि दिल्ली के क्रिकेटर फाइनल मैच जरूर जितवा देते हैं।

हालांकि कोहली रविवार को खेले गए मैच में टॉप स्कोरर रहे। भारत के 130 रनों के स्कोर में कोहली ने 77 रनों सबसे अहम भूमिका निभाई। उन्हें 'मैन ऑफ द टूर्नामेंट' चुना गया। लेकिन वह भारत को जीत दिलाने में असफल रहे। जबकि इससे पहले दिल्ली के खिलाड़ी टीम इंडिया को 2 वन डे वर्ल्ड कप, एक टी-20 वर्ल्ड कप और आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जिता चुके हैं।
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दिल्ली के ऑल राउंडर ने दिलाया पहला विश्वकप

क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लंदन के लॉर्ड्स मैदान पर 25 जून 1983 को इंडिया ने जब दुनिया की सबसे मजबूत टीम को हराकर ‌पहली बार वर्ल्ड कप जीता, तो दुनिया भर में खलबली मच गई। ले‌किन यह जीत दिलाने वाला कोई और नहीं बल्कि दिल्ली के बेहतरीन ऑल राउंडर मोहिंदर अमरनाथ थे।

1983 के वर्ल्ड कप फाइनल में जब पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया को महज 2 रन पर ही करारा झटका लग गया और भारत के सबसे धाकड़ बल्लेबाज सुनील गावस्कार 2 रन बनाकर पैवेलियन लौट गए, तो मोहिंदर अमरनाथ ने के श्रीकांत के साथ मिलकर पारी संभाली।

वह लंबे समय तक क्रीज पर डटे रहे और कुल 80 गेंदों का सामना करते हुए तीन चौकों की मदद से 26 रन जोड़े। वहीं जब बात गेंदबाजी की आई तो 7 ओवर में महज 12 रन खर्च करके 3 विकेट झटक लिए। इसके लिए उन्‍हें 'मैन ऑफ द मैच' चुना गया।

दिल्ली के लाल ने ही दिलाया दूसरा वर्ल्ड कप

ताज्जुब की बात है 27 साल बाद जब फिर से टीम इंडिया ने वर्ल्ड कप जीता, तब भी एक ‌दिल्‍ली के ही एक बल्‍लेबाज की बदौलत। यह बल्लेबाज हैं गौतम गंभीर।

मुम्बई के वानखेड़े स्टेडियम में 2 अप्रैल 2011 को जब इंडिया, श्रीलंका के 274 रनों के चुनौतीपूर्ण स्कोर का पीछा करने उतरी, तो पहले ही ओवर में सबसे खतरनाक बल्लेबाज विरेंद्र सहवाग बिना खाता खोले पैवेलियन वापस लौट गए। सचिन तेंदुलकर भी 18 रन बनाकर आउट हो गए।

तब गौतम गंभीर ने 97 रनों की यादगार पारी खेलकर भारत को एक ऐतिहासिक जीत के करीब पहुंचाया। यही नहीं गंभीर के साथ तीसरे विकेट के लिए बेहद जरूरी 83 रनों की साझेदारी निभाने वाले भी दिल्ली के ही खब्बू बल्लेबाज विराट कोहली थे।

टी-20 वर्ल्ड कप भी दिल्ली ने जितवाया

टीम इं‌डिया ने पहले टी-20 वर्ल्ड-कप को जीतकर इतिहास रच दिया था। पाकिस्तान के साथ हुए कड़े फाइनल मुकाबले में इंडिया को मिली जीत की नींव दिल्ली के ही बायें हाथ के क्लासिकल बल्लेबाज गौतम गंभीर ने ही रखी थी।

भारत ने पहले खेलते हुए कुल 157 रन बनाए थे, जिसमें 75 रन अकेले गौतम गंभीर ने बनाए थे। गंभीर ने 54 गेंदों का सामना करते हुए 8 चौकों और 2 छक्कों की मदद से ये रन बनाए थे।

खास बात ये है कि गौतम गंभीर ने यह पारी तब खेली जब दूसरे छोर से लगातार विकेट गिर रहे थे। भारत ने 157 रन बनाने के लिए पांच विकेट खोए। जब‌कि ओपनिंग करने आए गौतम गंभीर 18वें ओवर में पांचवें विकेट के रूप में आउट हुए थे।
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दिल्ली ने ही दिलाई आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी

मिनी वर्ल्ड कप कही जाने वाली आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी को भी 2013 में दिल्ली के ही लालों ने पहली बार पूरी तरह से इंडिया के माथे पर सजाया। गौरतलब है कि 2002 में इंडिया आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का श्रीलंका के साथ संयुक्त रूप से विजेता रही थी। सबसे खास बात यह है कि यह आखिरी आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी थी। आईसीसी ने इस‌के आखिरी चैंपियंस ट्रॉफी होने का घोषणा कर ‌दी थी।

आपको जानकर ताज्जुब होगा कि इंग्लैंड के ‌बर्गिंघम में 23 जून 2013 को हुए इस फाइनल मैच में इं‌डिया ने पहले खेलते हुए महज 129 रन बनाए। गौर करने की बात ये है कि टीम इं‌डिया यह स्कोर भी खड़ा नहीं कर पाती अगर दिल्ली के दो धुरंधर बल्लेबाजों (शिखर धवन, 31 रन और विराट कोहली, 43 रन) ने दो बेहद उपयोगी पारियां न खेली होतीं।

हालांकि इंडिया ने इस 50 ओवर के मैच में इंग्लैंड को 124 रनों पर ही रोक कर कमाल कर दिया था, जिसमें दिल्‍ली के गेंदबाज इशांत शर्मा (2 विकेट) ने अहम योगदान दिया था।
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