महिला ने कहा कि उसने 23 मार्च 21 को कोवाक्सीन की पहली डोज ली लेकिन उसने प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया। इसके बाद उसने 3 मार्च को वैक्सीन की दूसरी डोज ली तो उसे पहला डोज लेने का प्रामणपत्र जारी कर दिया गया।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने कोविड-19 टीकाकरण प्रमाण पत्र में कथित विसंगति से संबंधित मुद्दे पर केंद्र व अन्य संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। दरअसल एक महिला को टीके की पहली डोज देने के समय प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया जबकि उसे दूसरे डोज देने के बाद पहले डोज का प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने इस मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। याचिकाकर्ता जे मंगलम नामक महिला का दावा है कि उसे कलावती सरन चिल्ड्रेन अस्पताल (केसीएच) में दूसरे वैक्सीन डोज पर प्रशासन द्वारा टीकाकरण की पहली खुराक के लिए प्रमाण पत्र जारी किया गया था। इस प्रकार दोनों डोज लेने के बावजूद वह इसका लाभ नहीं उठा सकती।
महिला ने कहा कि उसने 23 मार्च 21 को कोवाक्सीन की पहली डोज ली लेकिन उसने प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया। इसके बाद उसने 3 मार्च को वैक्सीन की दूसरी डोज ली तो उसे पहला डोज लेने का प्रामण पत्र जारी कर दिया गया।
विज्ञापन
केंद्र व अन्य की और से पेश अधिवक्ता अनुज अग्रवाल ने अदालत को बताया कि भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में कोविन एप के माध्यम से वैक्सीन सर्टिफिकेट प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं।