एमसीआई ने भी अपनी पड़ताल के बाद गांधी नगर स्थित जैन चैरिटेबल ट्रस्ट अस्पताल के डॉक्टर ओम प्रकाश व राकेश त्यागी और प्रीत विहार स्थित तनेजा अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को लापरवाही का दोषी पाया था। हालांकि रिपोर्ट में तनेजा अस्पताल के डॉक्टर राकेश कुमार जैन व शेफाली चौहान के आचरण पर कुछ नहीं कहा गया है।
इसके बाद एमसीआई ने इनके नाम रजिस्टर से हटाने का निर्देश दिया था। अदालत ने एमसीआई की रिपोर्ट के बाद भी आरोपी डॉक्टरों पर कार्रवाई न करने वाले पुलिस वालों के खिलाफ जांच करने का निर्देश पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त को दिया है। हालांकि पुलिस ने रेनू की शिकायत पर 2014 में कई डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
अदालत ने कहा कि वह पुलिस की सुस्ती व लापरवाही से आहत हुई है। दस माह के बच्चे की मौत के बाद भी पुलिस नहीं जागी और संबंधित पुलिस अधिकारी एमसीआई की रिपोर्ट को दबाकर बैठे रहे।
तनेजा अस्पताल-जैन चैरिटेबल ट्रस्ट अस्पताल
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कोर्ट में शिकायत दायर कर रेनू त्यागी ने कहा कि उसने अपने दस माह के बच्चे को इलाज के लिए 28 नवंबर 2012 को जैन चैरिटेबल ट्रस्ट अस्पताल में भर्ती करवाया था। अस्पताल ने कुछ समय बाद बच्चे को प्रीत विहार स्थित तनेजा अस्पताल में शिफ्ट करवा दिया था। वहां इलाज के दौरान बच्चे की तबीयत बिगड़ गई थी। अस्पताल ने इलाज के लिए साढ़े तीन लाख रुपये वसूले थे।
बच्चे के इलाज के दौरान शिकायतकर्ता उसे देखने आईसीयू में गई थी। वह यह देखकर हिल गई थी कि उसके बच्चे के चेहरे पर चींटियां चल रही थीं। जब उसने डॉक्टर से कहा तो उन्होंने जवाब दिया कि हमारा काम इलाज करना है चींटियां हटाना नहीं।