एमसीडी के आयुक्त की ओर से शुक्रवार को प्रस्तुत किए जाने वाले बजट में विकास कार्यों व लोगों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए किसी भी बड़ी योजना के प्रस्ताव की झलक दिखाई देने की संभावना नहीं है।
वहीं दिल्ली निवासियों पर नया कर लगाने व वर्तमान करों में बढ़ोतरी का भी प्रस्ताव भी नहीं बताया जा रहा है। वह कुछ छोटी योजनाएं शुरू करने के प्रस्ताव लेकर आएगे। इसके अलावा वर्तमान में चल रही योजनाओं को आगे बढ़ाने पर उनका मुख्य जोर होगा।
सूत्रों के अनुसार, आयुक्त अपने बजट भाषण में मुख्य तौर पर गत एक वर्ष की उपलब्धियों का बखान करेंगे। दरअसल उन्होंने विवादों से बचने के लिए कोई भी ऐसा प्रस्ताव नहीं लाने का निर्णय लिया है जिनके कारण उन पर सवाल उठाए जाए।
इस कड़ी में वह एमसीडी की माली हालत सुधारने के लिए संपत्ति कर, पार्किंग फीस व अन्य फीस बढ़ाने का प्रस्ताव नहीं लेकर आ रहे है, जबकि करीब-करीब प्रतिवर्ष आयुक्त की ओर से नए कर लगाने व वर्तमान करों व फीस में बढ़ोतरी के प्रस्ताव लाए जाते रहे है।
दरअसल अगले साल लोकसभा चुनाव होने के मद्देनजर उनकी ओर से इस तरह के प्रस्ताव स्वीकृत होने की संभावना नहीं है। इतना ही नहीं, ऐसे प्रस्ताव लाने पर राजनीतिक दलों की ओर से उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाने की आशंका रहेगी।
सूत्र बताते है कि आयुक्त ने विकास कार्यों व लोगों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने की योजनाओं के भी प्रस्ताव नहीं लाने का निर्णय लिया है। उन्होंने यह मामला भी पूरी तरह सत्तापक्ष पर छोड़ने का फैसला किया है।
इस तरह बजट को अंतिम रूप देने के दौरान नेता सदन पर बजट को लोकलुभावना बनाने की जिम्मेदारी रहेगी, क्योंकि स्थायी समिति का गठन नहीं होने के कारण उन्हें ही पूरी तरह बजट तैयार करना है। लिहाजा वह आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की ओर से एमसीडी चुनाव के दी गई 10 गारंटी से जुड़े प्रस्ताव बजट में शामिल करने पर जोर देंगे।