यह सुन कमल वर्मा का गुस्सा भी सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने पूछा कि आखिर अस्पताल से कैसे कोई भाग सकता है और उनकी पत्नी को भागने की क्या जरूरत है? संक्रमित मरीज को कोविड वार्ड में रखा जाता है तो ऐसे कोई मरीज कैसे भाग सकता है?
बहरहाल इन सवाल के जवाब उन्हें नहीं मिले। अगले दिन रविवार को भी कमल वर्मा अस्पताल में कभी स्वास्थ्य कर्मचारी तो कभी एंबुलेंस वाले और बाकी तीमारदारों को फोटो दिखाते हुए पूछते रहे, भाई साहब, ये मेरी पत्नी हैं। क्या आपने इन्हें कहीं देखा है? यहीं अस्पताल में ही भर्ती कराया था। उसके बाद भी सुमन का कुछ पता नहीं चला।
तीसरे दिन मिला पत्नी का शव
दो दिन से अपनी पत्नी की तलाश करने वाले कमल वर्मा तीसरे दिन सोमवार को भी अस्पताल में अपनी पत्नी का फोटो दिखाते हुए पूछताछ कर रहे थे। इसी बीच उन्हें पता चला कि मोर्चरी में तीन शव हैं जिनकी पहचान नहीं हुई है। वहां एक बार देख लीजिए। कोरोना शवों को देखना भी संभव नहीं है। ऐसे में कमल वर्मा ने काफी प्रयास के बाद जब वहां जाकर देखा तो उनके होश ही उड़ गए। पत्नी सुमन वर्मा का शव पीपीई किट में लिपटा हुआ उनके सामने था। पत्नी की मौत का वियोग उनकी आंखों में था लेकिन आवाज और दिल में पीड़ा अस्पताल की इस करतूत पर थी।
शिकायत मिलने पर जांच कमेटी गठित की
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार पीड़ित की शिकायत मिलने के बाद जांच कमेटी गठित की थी। काफी पूछताछ के बाद मोर्चरी में मरीज सुमन का शव मिला। जबकि कमल वर्मा का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन झूठ बोल रहा है। किसी ने भी जांच नहीं की थी। वह खुद दो दिन अस्पताल में भूखे प्यासे धक्के खा रहे थे और आखिर में उन्होंने खुद अपनी पत्नी की तलाश पूरी की। बहरहाल इस मामले में अभी तक सख्त कार्रवाई होने की जानकारी नहीं मिली है।