लोकसभा चुनाव को देखते हुए नई दिल्ली कांग्रेस में फेरबदल की तैयारी शुरू हो गई है। शीला दीक्षित की दिल्ली से विदाई के बाद अब यह तय हो गया है कि पार्टी में दो ध्रुवीय शक्ति नहीं रहेगी।
ऐसे में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह के नेतृत्व को स्वीकारने से बचने वाले सीनियर नेता भी अब जुटने लगे हैं। अहम है कि प्रदेश की कार्यकारिणी, जिला व ब्लॉक का गठन पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामबाबू शर्मा के समय हुआ था। करीब-करीब वही टीम अब भी चल रही है।
सूत्रों के अनुसार लोकसभा चुनाव से पूर्व अल्पसंख्यक, पूर्वांचल, उत्तरांचल, एससी/एसटी समेत तमाम सेल जल्द भंग किए जाने की घोषणा हो सकती है।
यह भी पढ़ें: चुनाव आयोग ने नेताजी को दिया एक और झटका
इतना ही नहीं जिस तरह से विधायक दल के नेता हारून यूसुफ और पूर्व विधायक मुकेश शर्मा को साथ लेकर प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह ने अनुबंधित कर्मचारी, सोमनाथ भारती, जल बोर्ड और बिजली का मामला उठाया है, उससे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, विधान सभा अध्यक्ष व कई मंत्री भी प्रदेश कांग्रेस में सक्रिय हो गए हैं।
सूत्र बताते हैं कि पार्टी को लोकसभा चुनाव से पूर्व एक पूर्व मंत्री व दो पूर्व विधायकों को संगठन में अहम जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। कांग्रेस आलाकमान तक यह मामला पहुंच चुका है।
इतना ही नहीं कई जिलों और ब्लॉक के अध्यक्ष बदले जा सकते हैं। सूत्रों की मानें तो ऐसे कुछ लोगों को हटाया जाएगा जो काफी समय से पार्टी में अन्य लोगों को आगे बढ़ने का मौका नहीं दे रहे हैं या फिर संगठन के लिए काम नहीं कर रहे हैं।