सर बात पैसे की नहीं है। बात नीयत की है। दिल्ली सरकार अपने 70,000 करोड़ के बजट में से बुजुगों की तीर्थ यात्रा पर अगर 50 करोड़ खर्च कर देती है तो दिल्ली सरकार कोई गरीब नहीं हो जाती। आने वाले साल में केंद्र सरकार 45 लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसमें बुजुगों की रेल यात्रा में छूट पर मात्र 1600 करोड़ खर्च होते हैं। ये राशि समुद्र में एक बूंद जैसे है। इसके खर्च ना करने से कोई केंद्र सरकार अमीर नहीं हो जाएगी और इसके खर्च करने से केंद्र सरकार गरीब नहीं हो जायेगी। लेकिन जब इसे रोका जाता है तो हम एक तरह से अपने बुजुर्गों को संदेश दे रहे हैं कि हम आपकी परवाह नहीं करते। ये बहुत गलत है। ये भारतीय संस्कृति के खिलाफ है।
मैंने कई बुजुगों से बात की। रेल यात्रा में दी जा रही यह छोटी सी रियायत उनके लिए बड़ा मायने रखती है। अतः मेरी आपसे विनती है कि बुजुर्गों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द से जल्द इस रियायत को बहाल करने का कष्ट करें।