मसलन, जनकपुरी के त्रिलोक शर्मा ने बताया कि पिछले दिनों उनका डीएल गुम हो गया था। इसके लिए 11 सितंबर को उन्होंने कॉल सेंटर पर फोन किया। 12 को मोबाइल सहायक उनके घर पहुंचा और सारे दस्तावेज जमा करवाए। बेहतर अनुभव होने की बात करते हुए त्रिलोक शर्मा ने सुझाव दिया कि अभी मोबाइल सहायक के स्तर पर काम करने की जरूरत है। जिस सेवा को देने वह आवेदक के घर जा रहा है, उसके बारे में उसे जानकारी हो। इससे दोनों को दिक्कत नहीं होगी।
दूसरी तरफ रोहिणी के रतन जीत सिंह ने बताया कि उनका अनुभव मोबाइल सहायक के साथ बेहतर रहा। डुप्लीकेट डीएल के लिए 11 सितंबर की सुबह फोन करने पर शाम को घर पर मोबाइल सहायक घर आ गया। बिना किसी दिक्कत के सारी औपचारिकताएं पूरी हो गईं।