अदालत ने सीसीटीवी फुटेज देखने से पृथम दृष्टया साफ है कि मंत्री को लिफ्ट में रोक कर रखा गया, भारी भीड़ जमा थी और बल का इस्तेमाल भी हुआ। यह सीसीटीवी फुटेज मौजूदा मामले में एक अहम सबूत है।
इस पर कोई विवाद नहीं है कि सीसीटीवी फुटेज आम तौर पर अपने आप डिलीट हो जाती है और लिमिटेड पीरियड के लिए ही स्टोर रहती है। इसीलिए संबंधित फुटेज को सुरक्षित रखने और जब्त करने की बहुत जरूरत है, जरूरत पड़े तो डिवाइस को भी सुरक्षित रखा जाए।
हुसैन की ओर से एडवोकेट बीएस जून ने कोर्ट मे कहा कि मामले में सिर्फ हल्की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया जबकि संबंधित वीडियो से साफ है कि मंत्री पर ये हमला उस वक्त हुआ जब वह अपनी आधिकारिक जिम्मेदारी निभाने के लिए अपने ऑफिस जा रहे थे। इसीलिए मामले में आईपीसी की धारा 186,353,332 भी लगना चाहिए।
ये धाराएं सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा पहुंचाना, सरकारी कर्मचारी को अपनी जिम्मेदारी निभाने से रोकने के लिए बल का प्रयोग, और ऐसा जानबूझकर करने से जुड़ी हैं। सुनवाई के दौरान याची मंत्री की ओर से अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई।
इस पर कोर्ट ने संबंधित इलाके के डीसीपी को निर्देश दिया कि वह मंत्री की सुरक्षा के मुद्दे का आंकलन करे और उसके हिसाब से मंत्री को सुरक्षा मुहैया कराए। पुलिस को 8 मार्च तक इन आदेशों की कंप्लायंस रिपोर्ट देनी है।