वहीं डॉक्टरों का कहना है कि जब तक जमीनी स्तर पर हमें काम होता नजर नहीं आयेगा, तब तक सेवाएं चालू नहीं की जायेंगी। बता दें कि मंगलवार को हुई डॉक्टरों के साथ मारपीट के बाद बुधवार के दिन बैठकों का दौर चलता रहा, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
डॉ़ अंकुर ने बताया कि
बुधवार को सुबह पहले डायरेक्टर के साथ मीटिंग हुई, वह बेनतीजा रही। शाम होते-होते स्वास्थ्य विभाग के प्रिंसिपल सेकेट्री और स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन के साथ अलग-अलग मीटिंग हुईं लेकिन दोनों ने ही इस समस्या का समाधान निकालने के बजाय, दूसरों को इसका जिम्मेदार ठहराते नजर जिसके चलते कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका।
इसे देखते हुए डॉक्टरों ने हड़ताल को जारी रखने का फैसला लिया है। डॉक्टरों का कहना है कि इतने बड़े अस्पताल में रोजाना हजारों की संख्या में मरीज आते हैं लेकिन सुरक्षा गार्ड केवल 320 के आसपास हैं और वह भी रिटायर्ड हैं। ऐसे में वह हमारी सुरक्षा कैसे करेंगे।
डायरेक्टर ने स्वयं इस बात को माना था कि अस्पताल में करीबन 1000 गार्ड की जरूरत है और इसके लिए उन्होंने आयु सीमा 55 साल के भीतर निर्धारित की थी लेकिन फिर इस काम को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
हर मीटिंग में हमें केवल आश्वासन दिया जाता है लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्य नहीं किया जाता इसलिए अब जब तक जमीनी स्तर पर काम नजर नहीं आयेगा, मार्शल और गार्ड नियुक्त नहीं होंगे, तब तक इमरजेंसी सहित सभी सेवाएं बंद रहेंगी।
बता दें कि लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल के अलावा, जीबी पंत, गुरु नानक आई सेंटर और सुश्रुत ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों ने इमरजेंसी सेवाएं बंद कर रखी हैं।