गोपाल राय या कैलाश गहलोत क्यों नहीं
दरअसल, अभी से यह आशंका जताई जाने लगी है कि सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया के बाद कैलाश गहलोत जांच एजेंसियों के अगले शिकार हो सकते हैं। इसका बड़ा कारण है कि डीटीसी बसों की खरीद में कुछ अनियमितताएं पाई गई हैं और भाजपा ने इन मामलों की जांच की मांग की है। कैलाश गहलोत पर इनकम टैक्स छिपाने का भी आरोप लगा था। आम आदमी पार्टी के अंदर इस बात की चर्चा है कि कैलाश गहलोत के ऊपर भी देर-सबेर कार्रवाई हो सकती है।
वहीं, गोपाल राय के ऊपर प्रदेश में पार्टी की अहम जिम्मेदारी है। इसके पहले जब वे परिवहन मंत्रालय संभाल रहे थे, तब उन पर कुछ आरोप लगे थे। कहा जाता है कि उन आरोपों के बाद ही मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की उनसे बहुत ज्यादा पट नहीं रही है।
यही कारण है कि केजरीवाल ने यह अहम जिम्मेदारी देने के लिए ऐसे व्यक्ति को चुना, जो लंबे समय तक इन प्रमुख विभागों की जिम्मेदारी संभाल सके और दिल्ली सरकार की योजनाओं को प्रभावित न होने दे। इस कड़ी में आतिशी मार्लेना उनकी सबसे भरोसेमंद साथी बनकर उभरीं और केजरीवाल ने उन्हें इन महत्त्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दे दी। आम आदमी पार्टी का मानना है कि आतिशी पर निशाना साधना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा।
भाजपा ने किया हमला
आतिशी को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के दौरान ही भाजपा ने उन पर हमला बोलना शुरू कर दिया था। पार्टी ने उनके पुराने मामले को उछालते हुए कहा था कि वे लोकसभा चुनाव के दौरान अपना नाम बदलकर (आप नेता ने चुनाव में अपना नाम आतिशी सिंह कर दिया था।) मतदाताओं को धोखा दे रही थीं। आज जब आतिशी मार्लेना को वित्त एवं राजस्व मंत्री बनाए जाने का समाचार आया, भाजपा ने यह कहते हुए हमला किया कि उनकी नियुक्ति तिहाड़ जेल में बंद मनीष सिसोदिया के दबाव में किया गया है।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने आरोप लगाया कि आतिशी मार्लेना की वित्त मंत्री के रूप में नियुक्ति राजनीतिक ब्लैकमेलिंग का मामला है। उन्होंने कहा कि सिसोदिया ने केजरीवाल को आतिशी को वित्त मंत्री बनाने के लिए मजबूर किया है। मंत्रालय में गोपाल राय, कैलाश गहलोत और इमरान हुसैन जैसे वरिष्ठ मंत्रियों के बावजूद सीएम को सबसे कनिष्ठ मंत्री को प्रमुख विभाग सौंपना किसी साजिश की ओर इशारा कर रहा है।