दिल्ली की सड़कों पर ई-वाहन दौड़ाने का खाका केजरीवाल सरकार ने तैयार कर लिया है। सरकार सार्वजनिक से लेकर निजी क्षेत्र को ई-वाहन के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करेगी। इसके लिए बुनियादी ढांचे को भी मजबूत किया जाएगा। दिल्ली कैबिनेट ने सोमवार को ई-वाहन पॉलिसी को हरी झंडी दे दी है। इसके तहत 2024 तक दिल्ली में पंजीकृत होने वाले वाहनों में से 25 फीसदी ई- वाहन का लक्ष्य रखा गया है। इसे प्रोत्साहन देने के लिए सरकार पंजीकरण व रोड टैक्स में छूट के साथ सब्सिडी भी देगी।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया कि हर तीन किलोमीटर पर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग की सुविधा मुहैया कराने की योजना है। इसके लिए निजी क्षेत्रों को भी बड़े स्तर पर प्रोत्साहित किया जाएगा। बिल्डिंग बॉयलॉज में बदलाव कर पार्किंग स्थल पर कम से कम 20 फीसदी एरिया में चार्जिंग की सुविधा दी जाएगी। इसके अलावा खरीदी जाने वाली नई बसों में से 50 प्रतिशत ई-बसें खरीदने का लक्ष्य है।
प्रदूषण कम करना मुख्य मकसद : केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि इस पॉलिसी का मुख्य मकसद दिल्ली का प्रदूषण कम करना है। दिल्ली के प्रदूषण में सबसे ज्यादा हिस्सा वाहनों का होता है। 40 फीसदी पीएम 2.5 व 80 फीसदी कार्बन मोनो ऑक्साइड व नॉक्स वाहनों से होता है। इससे निपटने के लिए एक साल पहले इलेक्ट्रिक वाहन पॉलिसी का डॉफ्ट बनाकर पब्लिक डोमेन में डाला गया था। बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी राय दी। सभी सुझावों पर विचार करने के बाद यह पॉलिसी बनाई गई है। सरकार का मकसद है कि 2024 तक दिल्ली में जितने नए वाहन पंजीकृत होंगे, उसमें से कम से कम एक चौथाई (25 प्रतिशत) वाहन इलेक्ट्रिक होने चाहिए।
एक साल में 35000 ई-वाहन का लक्ष्य
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया कि अभी दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या .2 फीसदी व तिपहिया की संख्या तकरीबन शून्य है। नई पॉलिसी के तहत एक साल में 35 हजार इलेक्ट्रिक वाहन और 250 चार्जिंग स्टेशन बनाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, अगले पांच साल में इनकी संख्या पांच लाख करनी है। केजरीवाल के मुताबिक, इससे इन वाहनों से अपने लाइफ टाइम में 6 हजार करोड़ रुपये का तेल और गैस की बचत होगी। इससे 48 लाख टन कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन कम होगा। नए ई-वाहन 159 टन पीएम-2.5 भी कम करेंगे।