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दिल्ली कैबिनेट का फैसला: हर स्कूल में होंगे उर्दू, पंजाबी और संस्कृत शिक्षक

Sat, 25 Jun 2016 01:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली कैबिनेट ने शुक्रवार को पंजाबी के 789 पद और 610 उर्दू के प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक(टीजीटी)के पद को मंजूरी दी है। इससे सभी सरकारी स्कूलों में पंजाबी, उर्दू और संस्कृत के एक-एक शिक्षक की मौजूदगी तय होगी।
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अभी 98 फीसदी स्कूलों में संस्कृत, 24 फीसदी में पंजाबी और 25 फीसदी में उर्दू पढ़ाई जाती है। दिल्ली सरकार इस फैसले से माध्यमिक विद्यालय (दसवीं) स्तर तक तीनों भाषा की पढ़ाई सुनिश्चित करना चाहती है।

दिल्ली सरकार के अनुसार, वर्ष 2015-16 में 28,612 छात्रों ने पंजाबी भाषा और 82,341 छात्रों ने उर्दू भाषा का विकल्प चुना है। अभी इन स्कूलों में आठवीं कक्षा तक तीन और नौवीं-दसवीं कक्षाओं में सिर्फ दो भाषाएं पढ़ाई जाती हैं।
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तीन भाषाओं का फॉर्मूला तय

केजरीवाल और सिसोदिया - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली शिक्षा अधिनियम, 1973 की नियम 9 के अनुसार तीन भाषाओं का फॉर्मूला तय है। छठी से दसवीं कक्षा तक केंद्र सरकार की तरफ से अपनाए गए तीन भाषाओं के फॉर्मूले का ही अनुपालन होगा।

दिल्ली कैबिनेट ने राजधानी की शिक्षा में सुधार और छात्रों के चरित्र व व्यक्तित्व निर्माण की दिशा में काम करने के लिए सोसायटी फॉर एक्सिलेंस इन एजूकेशन के गठन का भी फैसला किया है। इस सोसायटी के माध्यम से छात्रों के चरित्र व व्यक्तित्व निर्माण पर भी ध्यान दिया जाएगा। शुरुआत में यह सोसायटी रोहिणी में दो और द्वारका में तीन स्कूलों का संचालन करेगी।

सरकार का कहना है कि इन्हीं क्षेत्र में सरकार के पास नए भवन उपलब्ध हैं। दिल्ली सरकार के अनुसार, यह सोसायटी 18 वर्ष तक के उम्र के बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की राह में मौजूद सामाजिक वर्गों के अंतर को भरने की दिशा में एक कदम है। सोसायटी में शिक्षा जगत के पेशेवर शामिल होंगे जो सरकारी स्कूलों में उपलब्ध कराई जा रही शिक्षा की तस्वीर बदलने में मदद करेंगे।
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