मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में शनिवार सुबह हुई दिल्ली कैबिनेट की बैठक में 1000 ई-बस खरीदने के परिवहन विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। क्लस्टर स्कीम के तहत डीटीसी के बेडे़ में आने वाली सभी बसें लो फ्लोर व वातानुकूलित होंगी।
अगले हफ्ते इसकी खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार का दावा है कि सड़क पर आने के बाद ई-बसों का बेड़ा देश में सबसे बड़ा होगा। वहीं, चीन के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर ई-बसों की संख्या में दिल्ली में होगी। इससे मुसाफिरों को सहूलियत मिलने के साथ दिल्ली की आबोहवा भी बेहतर होगी।
परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने शनिवार को एतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि यह फैसला दिल्लीवालों के भविष्य के लिए बेहतर साबित होगा। जबकि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्लीवालों को बधाई देते हुए कहा कि बहुत सारी अड़चनों को दूर करते हुए दिल्ली कैबिनेट ने एक हजार ई-बस लाने को मंजूरी दी है।
दिल्ली देश की सबसे बड़ा ई-बस चलाने वाले शहर बनने जा रहा है। दिल्ली कैबिनेट ने परिवहन विभाग के बसों में सीसीटीवी कैमरा, ऑटोमेटिक व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम, पैनिक बटन व पैनिक अलार्म लगाने के प्रस्ताव को भी मंजूर किया है।
कैबिनेट ने परिवहन मंत्री को इस प्रोजेक्ट की सेवा-शर्तें का तय करने के लिए अधिकृत किया है। अधिकारी बताते हैं कि सभी 1000 बसें एक साथ नहीं आएगी। इन्हें अलग-अलग मे चरणों में उतारा जाएगा। पहले फेज के टेंडर की प्रक्रिया अगले सप्ताह शुरू होगी। इस फेज की बसें 2019 तक सड़क पर आ जाएंगी।
फैक्ट फाइल:
-ई-बसों को 6 डिपो में पार्क किया जाएगा, जहां चार्जिंग का पूरा बुनियादी ढांचा होगा।
-चार्जिंग सिस्टम तक बिजली पहुंचाने का जिम्मा सरकार पर पर होगा।
-चार्जिंग का बुनियादी ढांचा व चार्जिंग प्वाइंट सेवा प्रदाता कंपनी तैयार करेगी।
-सरकार ई-बसों पर सब्सिडी देगी। सब्सिडी की राशि प्रति बस 75 लाख रुपये या कुल कीमत का 60 फीसदी (जो भी कम हो) होगी। इसे तीन किश्तों में जारी किया जाएगा।
-सब्सिडी व डिपो में चार्र्जिंग का बुनियादी ढांचा तैयार करने पर 800 करोड़ रुपये खर्च होगा। इसके बजट का इंतजाम एनवायरमेंट कंपनसेंशन चार्ज (ईसीसी) फंड से होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ईसीसी फंड का निर्माण 1100 करोड़ से किया गया था।
-बसों के संचालन व उसके रखरखाव का जिम्मा सेवा प्रदाता पर होगा।
-सरकार सब्सिडी के अलावा निजी कंपनी को प्रति किलोमीटर के हिसाब भुगतान की दर तय करेगी।
पहले से चल रहा ट्रायल सफल
दिल्ली सरकार ने एक हजार इलेक्ट्रिक बसों को राजधानी की सड़कों पर उतारने के पहले इलेक्ट्रिक बसों का ट्रायल शुरू कर दिया था। 522 नंबर रूट पर आंबेडकर नगर टर्मिनल से इंद्रपुरी (कृषि कुंज) के बीच एक इलेक्ट्रिक बस चलाई जा रही है।
अधिकारी बताते हैं कि ई-बस का ट्रायल सफल रहा है। बसों का ऑपरेशनल कॉस्ट प्रति किलोमीटर 80-100 रुपये बीच आएगा। इलेक्ट्रिक बस चॉर्ज करने में 6 से 7 घंटे का समय लगेगा। एक बार फुल चॉर्ज होने पर बस करीब 200 किलोमीटर की दूरी तय करेगी।