विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के बजट सत्र में आम आदमी पार्टी का बिखराव और अनुशासनहीनता खुलकर सामने आ गए हैं। विधायकों ने सदन की कार्यवाही में रुचि नहीं ली। इस कारण छह दिन के सत्र में तीन बार कोरम पूरा न होने के कारण सदन को स्थगित करना पड़ा। सत्र में सरकार की अक्षमता, झूठ बोलने की कला और विपक्ष का दमन करने की नीति एक बार फिर जमकर उजागर हुई। पूरा सत्र निरर्थक और औपचारिक बनकर रह गया। सच्चाई और जनता की भलाई कोसों दूर रही।
उन्होंने कहा कि विकास और जनकल्याण की जगह मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्री केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री, उपराज्यपाल को लेकर राजनीति खेलकर लोकसभा चुनावों के मद्देनजर अपनी पार्टी की बिसात बिछाने में लगे रहे। मुख्यमंत्री के 24 लाख वोटरों के नाम लिस्ट से नाम निकालने के महीनों से चल रहे प्रोपेगेंडा की पोल खुल गई। उनके मंत्री ने नेता विपक्ष के प्रश्न के जवाब में सदन में जो उत्तर दिया, उसी से मुख्यमंत्री के झूठ का पर्दाफाश हो गया।
नेता विपक्ष ने कहा कि सत्र में सरकार के झूठ बोलने की कला में पारंगत होने के बावजूद उसे विपक्ष के हाथों कई मामलों में मुंह की खानी पड़ी। मंत्री इमरान हुसैन द्वारा चुनाव आयोग का पत्र छिपाने और रिपोर्ट प्रस्तुत न करने के कारण उन्हें अवमानना का नोटिस लाना पड़ा। विपक्ष ने आयुर्वेदिक दवाइयों की खरीद में सरकार की नाक के नीचे चल रहे लगभग 100 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार को उजागर किया।
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि पूरा सत्र निरर्थक और औपचारिक रहा। न कोई बिल लाया गया और न सरकार किसी भी सवाल का गंभीरतापूर्वक जवाब देती नजर आई। सरकार का यह अंतिम बजट था। चुनाव घोषणा पत्र में किए गए 70 वायदों को पूरा करने का भी यह आखिरी मौका था, पर सरकार अपने वायदों को लेकर कहीं गंभीर नजर नहीं आई। उसने घुमा-फिराकर जनता की आंखों में धूल झोंकने की भरसक कोशिश की।