दिल्ली में सरकार बनाने की कवायद कर सुर्खियां बटोरने वाली भाजपा अब अपने संगठन को और मजबूत करेगी। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान के उपचुनाव में बेहतर प्रदर्शन नहीं करने के पीछे कमजोर संगठन की बात कही जा रही है।
दिल्ली के भाजपा अध्यक्ष का एमसीडी स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष पद छोड़ने का ऐलान करना भी यही संकेत दे रहा है। जिससे वह सिर्फ संगठन पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने के मैजिक आंकड़े को नहीं जुटा पाने की टीस आज भी भाजपा को है। चुनावी समीक्षा के दौरान भी कमजोर संगठन की बात सामने आई थी। उत्तर प्रदेश विधानसभा उपचुनाव का परिणाम भी इस दिशा में कार्य करने का संकेत दे रहा है। लिहाजा अब भाजपा का फोकस संगठन को मजबूत करने पर टिक गया है।
जल्द आएगी नई टीम, खास मुहूर्त का इंतजार
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय का भी कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष बनने के साथ खुद उन्होंने वादा किया था कि दिल्ली में एक मजबूत संगठन बनाना है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने बड़ी जिम्मेदारी दी है। एमसीडी स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष के पास भी बड़ी जिम्मेदारी होती है।
लिहाजा संगठन को मजबूत करने के लिए स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की पेशकश की है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि उपचुनाव के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने भी संगठन की मजबूती पर केंद्रित रहने को कहा है।
जल्द ही नई टीम का ऐलान
प्रदेश की नई कार्यकारिणी का भी ऐलान होना है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश की नई टीम की सूची पर फैसला कर लिया है। अब इंतजार है तो सिर्फ पितृपक्ष के खत्म होने का। इसके खत्म होने के साथ ही नई ऊर्जा के साथ भाजपा अपने कार्यकर्ताओं के साथ काम करना शुरू कर देगी।
दरअसल, भाजपा को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी भी करनी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अगर दिल्ली में सरकार बनती भी है तो ज्यादा दिनों तक की नहीं होगी। ऐसे में चुनाव के लिए तैयार रहना जरूरी है।
सतीश उपाध्याय आज छोड़ेंगे अध्यक्ष का पद
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने दक्षिण दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति के अध्यक्ष पद सेे बृहस्पतिवार को त्यागपत्र देने का फैसला किया है। सदन की बैठक में इस संबंध में उन्होंने बुधवार को ऐलान किया।
दक्षिण दिल्ली नगर निगम के सदन की बैठक में बुधवार को सतीश उपाध्याय ने बताया कि वह बृहस्पतिवार को स्थायी समिति बैठक की अंतिम बार अध्यक्षता करेंगे। बैठक के बाद वह समिति के अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे देंगे। उन्होंने यह निर्णय पार्टी के एक व्यक्ति एक पद के नियम के तहत लिया है।
उपाध्याय के सदन से जाते ही कई पार्षद उनसे उनके कक्ष में मिलने पहुंचे और समिति का अध्यक्ष बनने की मंशा जाहिर की। भाजपा के आधा दर्जन पार्षद समिति का अध्यक्ष बनने के लिए दो माह से लॉबिंग कर रहे थे।
एक बार भी कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए उपाध्याय
अध्यक्ष पद की दौड़ में सदन के नेता सुभाष आर्य, शिक्षा समिति के अध्यक्ष आशीष सूद, स्थायी समिति के उपाध्यक्ष डॉ. पंकज सिंह, समिति के सदस्य कुलदीप सोलंकी, राधेश्याम आदि हैं।
प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सतीश उपाध्याय दो बार स्थायी समिति का अध्यक्ष बनने के बावजूद एक बार भी कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। गत वर्ष दिसंबर में विधायक बनने पर राजेश गहलोट ने समिति के अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया था।
इसके चलते भाजपा ने इस वर्ष जनवरी माह में उपाध्याय को समिति का अध्यक्ष बना दिया। वहीं मई में समिति के वार्षिक चुनाव में वह पुन: अध्यक्ष बने। उनका कार्यालय अगले वर्ष मई तक था। प्रदेश अध्यक्ष बनने के चलते उनको एक व्यक्ति एक पद के पार्टी के नियम के चलते समिति के अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देना पड़ गया।