चुनावों के साथ-साथ नोएडा ही नहीं यूपी में भी कांग्रेस का जनाधार गिरता चला गया है। हालत ये हो गई है कि जमानत बचाना तक मुश्किल हो गया। पार्टी के गिरते जनाधार के प्रमुख कारणों में से एक अंदरूनी गुटबाजी है, जिसको दूर करने के लिए प्रदेश अध्यक्ष ने पदाधिकारियों को तलब किया है।
परिसीमन के बाद बनी नोएडा विधानसभा सीट पर हुए चुनावों में कांग्रेस का जनाधार खिसकता चला गया। जहां 2009 तक कांग्रेस विपक्षी पार्टी सपा को टक्कर देती थी। वहीं पार्टी 2014 के आते-आते आसपास भी दिखाई नहीं देती।
2009 लोस चुनाव में कांग्रेस को सपा से महज दो हजार वोट कम मिले थे। लेकिन 2014 के विधानसभा में ये अंतर 20 हजार से अधिक का हो गया। दूसरी तरफ विधानसभा चुनावों की ही बात करें तो कांग्रेस को 2002 में करीब 39 हजार, 2012 में करीब 25 हजार जबकि इस बार महज 17 हजार मत प्राप्त हुए।
साल दर साल क्षेत्र में सिमटती पार्टी का एक कारण अंदरूनी गुटबाजी है। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी इस बात को स्वीकार भी करते हैं। वरिष्ठ कांग्रेसी ने बताया कि पार्टी को पदाधिकारियों की गुटबाजी ले डूबी है।