दिल्ली के गाजीपुर इलाके में बना डंपिंग यार्ड शुक्रवार को ढह गया। हादसे में एक महिला और एक युवक की मौत हो गई। कई लोग घायल हुए हैं। दिल्ली के गाजीपुर और आसपास के इलाके में इस डंपिंग यार्ड की वजह से कई तरह की बीमारियां फैल रही थीं।
आज इसके ढहने से दो लोगों की जान चली गई। अगर अभी सावधानी नहीं बरती गई, तो दिल्ली के भलस्वा लैंडफिल में कभी भी ऐसे हादसे हो सकते हैं।
उत्तर भारत का सबसे बड़ा डंपिंग यार्ड है गाजीपुर लैंडफिल
दिल्ली के गाजीपुर में कचरे का लैंडफिल उत्तर भारत का सबसे बड़ा डंपिंग यार्ड है। यह 70 एकड़ में फैला है। इसकी ऊंचाई 50 फीट है। इसमें साल 1984 से दिल्ली शहर का कचरा डाला जा रहा है। दिल्ली में रोजाना 14 हजार टन कूड़ा यहां इकट्ठा होता है। कुल 600 ट्रकों में भरकर यहां कूड़ा लाया जाता है। यहां करीब 3500 मिट्रिक टन कूड़ा डंप होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस डंपिंग यार्ड को बंद करने या कहीं और शिफ्ट करने की मांग कई बार की जा चुकी है।
कूड़े के पहाड़ से बढ़ता है प्रदूषण
दिल्ली और गाजियाबाद में बढ़ते प्रदूषण का भी काफी हद तक जिम्मेदार इस कूड़े के पहाड़ को माना जाता रहा है। कूड़े का पहाड़ आसपास रहने वाले लोगों और बगल के रास्ते से गुजरने वाले मुसाफिरों के लिए काफी लंबे समय से बड़ी मुसीबत साबित हो रहा है। यहां से निकलने वाली बदबू और जहरीली गैसों के चलते लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है। इस पहाड़ में कई जगह आग भी लगी रहती है, जिससे मिथेन जैसी जहरीली गैसों का रिसाव होता रहता है।
इन लैंडफिल में कभी भी हो सकता है हादसा
राजधानी में कूड़े के प्रबंधन और कूड़ा डालने का कोई इंतजाम नहीं है। इसके चलते से गाजीपुर, भलस्वा और ओखला सेनेटरी लैंडफिल में कूड़ा डालने की अवधि खत्म होने के बावजूद उनमें कूड़ा डाला जा रहा है। उनमें कूड़ा डालने की अवधि वर्ष 10 वर्ष पूर्व यानि 2007 में खत्म हो चुकी है। लिहाजा आज इन तीनों सेनेटरी लैंडफिल में कूड़े के ढेर पहाड़ों से भी ऊंचे लग चुके है और उनमें गैस बनने की वजह से आग लगने की घटनाएं आम हो चुकी है।
दो दशक पहले बनाए गए थे लैंडफिल
एकीकृत नगर निगम के जमाने में दिल्ली का कूड़ा डालने के लिए करीब दो से तीन दशक पहले गाजीपुर, भलस्वा और ओखला में सेनेटरी लैंडफिल बनाए गए थे। उस दौरान अनुमान लगाया गया था कि यह सेनेटरी लैंडफिल वर्ष 2008 तक कूड़े से पट जाएंगे। मगर यह तीनों सेनेटरी लैंडफिल तय अवधि से करीब पांच वर्ष पहले ही कूड़े से भर गए।