दिल्ली गर्म द्वीपों का शहर बनने की राह पर है। पिछले एक दशक में राजधानी के कई इलाकों में औसत तापमान पांच डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है।
विशेषज्ञों की मानें तो इसका असर बारिश पर पड़ रहा है। पूरे मानसून के दौरान कभी नई दिल्ली में झमाझम बारिश हुई तो बाहरी दिल्ली धूप में तपती रही। आईटीओ भीगा, लेकिन लक्ष्मी नगर में बूंदाबांदी भर हुई। मानसून के तीन-चार दिनों के अलावा पूरी दिल्ली एक साथ नहीं भीगी।
टेरी विश्वविद्यालय दिल्ली के गर्म द्वीपों पर शोध कर रही है। शोध में वर्ष 1998, 2003 और 2011 के तापमान का सेटेलाइट डाटा के आधार पर सालाना औसत तापमान का आकलन किया है। प्राथमिक आंकड़े बताते हैं कि 1998 के बाद से पूरी दिल्ली का औसत तापमान बढ़ा है।
हालांकि शहर के कुछ खास इलाकों में औसत तापमान 4-5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है। सबसे ज्यादा इजाफा त्रिनगर, चांदनी चौक और गांधी नगर जैसे व्यावसायिक इलाकों में हुआ है। जबकि अन्य इलाकों का औसत तापमान 0.01-3 डिग्री सेल्सियस ऊपर गया है। विशेषज्ञों की मानें तो गर्म द्वीप स्थानीय मौसम पर सीधा असर डाल रहे हैं।
गर्म इलाकों में अपेक्षाकृत बारिश कम होती है, जबकि हरे-भरे इलाकों में ज्यादा। इसकी वजह यह है कि हरे क्षेत्र हवा की नमी खींच लेते हैं। जबकि कंक्रीट वाले इलाके की हवा पूरी तरह शुष्क रहती है। इस बार दिल्ली में इसी तरह की बारिश हुई।
टेरी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पीके जोशी बताते हैं कि गर्म द्वीपों का अहसास सुबह और रात को आसानी से महसूस किया जा सकता है। तुलनात्मक रूप से इस दौरान यहां का तापमान ज्यादा होता है। इसकी बड़ी वजह वायु प्रदूषण और ईंट-पत्थर की इमारतें हैं।
इससे बचने की अहम रास्ता यह होगा कि मौजूदा हरे क्षेत्रों का संरक्षण किया जाए। वहीं, पर्यावरण अनुकूल इमारतों का निर्माण हो। फिर, खेतिहर इलाकों में ज्यादा समय पर हरी-भरी हरने वाली फसलों को लगाया जाए।
क्या हैं शहरी गर्म द्वीप
शहरों के बीच बसे ऐसे इलाके, जहां का औसत सालाना तापमान अपने आसपास के क्षेत्रों से ज्यादा दर्ज होता है उन्हें गर्म द्वीप माना जाता है। शोध के मुताबिक दिल्ली में त्रिनगर, चांदनी चौक, गांधी नगर, ईस्ट पटेल नगर, मंडावली और उस्मानपुर इलाके इसी श्रेणी में आते हैं।
बढ़ते तापमान का असर
पानी की गुणवत्ता होती है प्रभावित।
ऊर्जा की मांग में इजाफा, एसी, फ्रिज ज्यादा चलने से बढ़ता है वायु प्रदूषण।
बच्चों और बुजुर्गों में दिल व सांस से जुड़ी बीमारियों की बढ़ जाती है आशंका।
सुबह और शाम का तापमान होता है ज्यादा।
गर्म द्वीप बनने की बड़ी वजहें
व्यावसायिक इलाकों में प्रदूषण का स्तर रहना
पटेल नगर, मंडावली, उस्मानपुर जैसे इलाकों की घनी बसावट, वाहनों की संख्या ज्यादा
आवासीय व व्यावसायिक परिसरों की संख्या बढ़ने से बढ़ा तापमान
प्रदूषकों की मात्रा बढ़ने के साथ जमीन के नजदीक ओजोन का स्तर भी बढ़ा। दोनों ने मिलकर बढ़ाई गर्मी।
सतह का तापमान:
स्थान-------1998-----2011
बल्लीमरान----33.15-----37.10
शकरपुर-----32.93------36.61
पहाड़गंज-----32.40-----36.21
सदर बाजार---32.91----37.01
बाबरपुर-----32.30------35.50
आदर्श नगर---34.29----38.20
हरकेश नगर---33.36----36.18
सागरपुर-----32.42------36.36
आनंद पर्वत---33.44----37.12
नोट- औसत सालाना तापमान, सभी तापमान डिग्री सेल्सियस में।