प्रश्न- शीला दीक्षित के नेतृत्व में कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव बहुत मजबूती के साथ लड़ा। आपने अच्छा प्रदर्शन भी किया। विधानसभा चुनाव में इसे आगे बढ़ाए जाने की जरूरत जरूरत थी, लेकिन ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस उतनी कोशिश नहीं कर रही है। आपके शीर्ष नेता चुनाव से दूर हैं। आपका क्या कहना है?
उत्तर- नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। हम अपनी पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ रहे हैं और हम चुनाव जीतकर रहेंगे। हमारे बहुत से उम्मीदवार बड़ी मजबूती से लड़ाई लड़ रहे हैं और वे जीत भी हासिल करेंगे। बड़े नेता भी कल से चुनाव प्रचार में उतर रहे हैं।
प्रश्न- विधानसभा चुनाव में आप के कई बड़े नेता चुनावी मैदान में नहीं उतरे। किरण वालिया, सुभाष चोपड़ा, जेपी अग्रवाल, संदीप दीक्षित और अजय माकन जैसे कई बड़े नेता हैं जो अगर चुनावी मैदान में उतरते तो कई सीटों पर कांग्रेस के लिए स्थिति बदल सकती थी। क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि इन चेहरों को चुनाव में न उतारने पर पार्टी को नुकसान हो सकता है?
उत्तर- मुझे नहीं लगता कि यह कोई मुद्दा है। पार्टी के कई बड़े चेहरे चुनाव मैदान में हैं। अपने इन्हीं प्रत्याशियों के दम पर हम अच्छी चुनौती पेश कर रहे हैं। सबकी अपनी कुछ निजी व्यस्तताएं हो सकती हैं जिसकी वजह से ये नेता चुनाव में नहीं उतरे, लेकिन इसको किसी दूसरे संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए।
प्रश्न- मौजूदा चुनाव में शाहीन बाग का मुद्दा खूब उछाला जा रहा है। आपको क्या लगता है यह चुनाव को कितना प्रभावित कर पायेगा?
उत्तर- अगर किसी व्यक्ति को 70 साल एक जगह रहने के बाद कहा जाएगा कि वह यहां का रहने वाला नहीं है तो इसके खिलाफ उग्र प्रतिक्रिया होनी स्वाभाविक है। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि समाज को बांटने का काम कोई और नहीं, बल्कि सरकार खुद कर रही है। ऐसे में कुछ लोगों की नाराजगी सामने आना बेहद स्वाभाविक है और मुझे लगता है कि जनता अपनी बात वोटों के जरिए जरूर रखेगी। लेकिन यह बहुत दुर्भाग्य की बात है कि आम आदमी पार्टी सरकार के मुखिया अरविंद केजरीवाल आज तक शाहिनबाग नहीं पहुंच सके। वे दिल्ली सरकार के प्रमुख हैं और पूरी दिल्ली में कहीं भी कुछ भी गलत हो तो वहां उनका पहुंचना बेहद आवश्यक है, लेकिन वे आजतक तक वहां पर नहीं पहुंच सके जो यह दिखाता है कि उनकी सोच में कुछ गलत है। उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि वे आज वहां क्यों नहीं हैं।