बिहार, झारखंड और पूर्वांचल से आकर दिल्ली में बसे लोगों ने यहां से समीकरण को जिस तरह अपने हाथों में ले लिया है, उसके बाद सभी पार्टियों की रणनीति पूर्वांचली वोटरों के इर्द-गिर्द ही घूमती नजर आ रही है। इस बार निर्णायक भूमिका निभा रहे पूर्वांचलियों को कोई नाराज नहीं करना चाहता। भाजपा के पूर्वांचली नेता मनोज तिवारी ने चुनावी घमासान के बीच पूर्वांचलियों के लिए भोजपुरी में ट्वीट किया है।
उन्होंने लिखा है कि, "पूर्वांचली लोग जोड़ेला, तोड़ेला नाहीं... मेहनत करेला, हाथ नाहीं फइलावे, ना त कोई के अपमान करेला, ना सहेला..."। इसका मतलब है कि पूर्वांचली लोग जोड़ने में विश्वास रखते हैं, तोड़ने में नहीं। पूर्वांचली मेहनती होते हैं, मेहनत करते हैं, हाथ नहीं फैलाते। वे न तो किसी का अपमान करते हैं और न ही अपना अपमान सहते हैं।
इसके साथ ही मनोज तिवारी ने हैश टैग में भी भोजपुरी में लिखा कि दिल्ली हमर मां, यानी दिल्ली हमारी मां है। मालूम हो कि 2015 के चुनाव में आम आदमी पार्टी के 'पूर्वांचली कॉन्सेप्ट' ने जिस तरह दिल्ली से कांग्रेस का सफाया कर दिया, उससे भाजपा को भी झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से आए लोगों की आबादी का अंदाजा हुआ। जिसके बाद पूर्वांचल के लोकप्रिय चेहरे मनोज तिवारी को दिल्ली प्रदेश की कमान सौंपी गई।
2015 के मुकाबले इस बार भाजपा ने अधिक पूर्वांचली उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। इस के साथ ही चुनाव में जदयू और लोजपा से साथ गठबंधन भी कर लिया है। इसके अलावा भाजपा के स्टार प्रचारकों की सूची में भी कई ऐसे नाम हैं जो पार्टी की रणनीति साफ करते हैं।
भाजपा ने प्रचारकों में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, नित्यानंद राय मनोज तिवारी, निरहुआ, रवि किशन को शामिल किया है। ये सभी ऐसे नेता हैं जिनका पूर्वांचल के मतदाताओं पर सीधा असर पड़ सकता है।