निर्भया गैंगरेप केस के एक और दोषी अक्षय ठाकुर ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के समक्ष दया याचिका दयार की है। आज ही दोषी विनय शर्मा की दया याचिका राष्ट्रपति ने की खारिज की थी। इससे पहले मुकेश सिंह की दया याचिका भी राष्ट्रपति खारिज कर चुके हैं। बता दें कि एक अन्य गुनाहगार पवन गुप्ता ने अभी तक दया याचिका दाखिल नहीं की है।
इससे पहले बृहस्पतिवार को निर्भया के दोषी अक्षय कुमार की सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव याचिका खारिज की थी। अब उसके पास सिर्फ राष्ट्रपति को दया याचिका भेजने का विकल्प ही मौजूद था। यह अक्षय के पास आखिरी मौका था।
अक्षय की याचिका में बेतुकी दलीलें
अक्षय ने अपनी सुधारात्मक याचिका में कहा गया था कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर जन दबाव और जनता की राय के चलते अदालतें सभी समस्याओं के समाधान के रूप में फांसी की सजा सुना रही हैं।
अक्षय ने अपनी याचिका में दावा किया था कि दुष्कर्म एवं हत्या के करीब 17 मामलों में शीर्ष न्यायालय के तीन जजों की पीठ ने मौत की सजा में बदलाव कर उसे कम किया है।
दोषियों के पास हैं अब ये विकल्प
ऐसे ही एक मामले में एक नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म एवं हत्या के मामले में मौत की सजा को इस कोर्ट ने एक पुनर्विचार फैसले में घटा कर 20 साल के सश्रम कारावास में तब्दील कर दिया। यह इस आधार पर किया गया कि दोषी की कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं थी और उसके सुधार की अब भी गुंजाइश है।
याचिका में जस्टिस जेएस वर्मा कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया था कि समिति ने दुष्कर्म एवं हत्या के अपराधों के लिए मौत की सजा के खिलाफ पैरोकारी की है।