दिल्ली सरकार की केंद्र के साथ टकराव की नई जमीन तैयार हो गई है। इस बार मसला केंद्रीय करों में दिल्ली की हिस्सेदारी का है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना है कि दिल्लीवासियों से लिए जाने वाले टैक्स का मामूली हिस्सा ही केंद्र सरकार लौटाती है, जबकि विकास कार्यों के लिए मोटी रकम चाहिए।
दिल्ली सरकार केंद्र के सामने यह मसला उठाएगी। रविवार शाम केजरीवाल करावल नगर में एक जनसभा में बोल रहे थे। इसका आयोजन अनधिकृत कॉलोनियों के मसलों को लेकर किया गया था। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया कि चार अनधिकृत कॉलोनियों का नक्शा एक हफ्ते में तैयार हो जाएगा। वहीं, 895 कॉलोनियों का नक्शा बनने में एक साल लगेंगे। जैसे-जैसे नक्शा बनता जाएगा, वहां के मकानों की रजिस्ट्री शुरू हो जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके साथ ही दिल्ली सरकार सभी कॉलोनियों का मुआयना करा रही है। यहां छह बुनियादी सुविधाओं पानी, सीवर, नाली, सड़क, स्ट्रीट लाइन और साफ-सफाई का विकास करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास के लिए दिल्ली सरकार को बहुत पैसा चाहिए। इसे पूरा करने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की भी है। फिलहाल, दिल्ली बतौर कर केंद्र को करीब 65 हजार करोड़ रुपये देती है, लेकिन केंद्र सरकार इसमें से सिर्फ 325 करोड़ रुपये लौटाती है।