चिकित्सीय क्षेत्र में अग्रणी दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) कोरोना वायरस को लेकर बैकफुट पर खड़ा नजर आ रहा है। यहां के ट्रॉमा सेंटर में 200 बिस्तरों की क्षमता होने के बाद भी 18 मरीज भर्ती हैं। यहां नॉन कोविड मरीजों को दूसरे अस्पतालों में जाने की सलाह दी जाती है।
दिल्ली सरकार के अनुसार, केंद्र के सफदरजंग में 103, आरएमएल में 57 और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में 26 कोरोना मरीज भर्ती हैं। इसे लेकर एक दिन पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में हुई बैठक में यह मुद्दा दिल्ली सरकार की ओर से भी उठाया गया।
स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि नॉन कोविड मरीजों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। सफदरजंग, आरएमएल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज को मिलाकर चार हजार बिस्तरों की व्यवस्था है, लेकिन यहां नॉन कोविड मरीजों को यह कहकर दूसरे अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है कि यह अस्पताल कोविड मरीजों के लिए है, जो उचित नहीं है।
जैन ने सुझाव दिया कि इनमें से किन्हीं दो अस्पतालों को नॉन कोविड करार दिया जाए, ताकि कोरोना के अलावा दूसरी बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को उपचार मिल सके।
दरअसल, कोरोना वायरस का सिलसिला शुरू होते ही दिल्ली के अस्पतालों में ओपीडी और फिर पहले से तय ऑपरेशन रोक दिए गए। इसके चलते उन मरीजों की तकलीफ और भी ज्यादा बढ़ गई जिन्हें कोरोना संक्रमण भी नहीं है।
बुधवार को दिल्ली पुलिस के जवान की मौत होने के बाद भी अस्पतालों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि एम्स ट्रॉमा और झज्जर परिसर में संक्रमण के हिसाब से मरीजों को उपचार दिया जा रहा है।
यहां बेहतर उपचार दिया जा रहा है और प्रोटोकॉल का भी पालन किया जा रहा है। उन्होंने दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री से यहां तक कह दिया कि एक बार एम्स के दोनों केंद्रों का दौरा कर लीजिए।