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Delhi AIIMS: इंट्रा-हॉस्पिटल सिस्टम होगा तैयार, मरीजों को मिलेगा फायदा,अभी सुरक्षा गार्ड पर रहते हैं निर्भर

Tue, 18 Apr 2023 01:46 AM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

एम्स में तैयार होने वाले इनडोर नेविगेशन प्रणाली से परिसर के भीतर की जानकारी वास्तविक समय दिशा-निर्देश के साथ मिल सकेगी। यह कर्मचारियों को अधिक कुशल बनाने और रोगियों या आगंतुकों के खो जाने के जोखिम को कम करने में भी सक्षम होगा।
 
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दिल्ली एम्स (फाइल फोटो ) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली में उपचार करवाने आ रहे मरीजों को जल्द ही लैब, ऑपरेशन थियेटर सहित अन्य की तलाश के लिए भटकना नहीं होगा। महज एक क्लिक से उन्हें पता चल जाएगा कि उक्त जगह पर कहा हैं और वहां तक कैसे जाना है। मरीजों की समस्या को देखते हुए एम्स ने स्वदेशी इंट्रा-हॉस्पिटल नेविगेशन सिस्टम की खरीद के लिए समिति का गठन किया है। यह समिति अगले सात दिनों में अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। साथ ही अगले तीन माह में यह सेवा शुरू करने की दिशा में काम करेगी। इसे लेकर एम्स निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास ने एक आदेश जारी किया है।

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एम्स से मिली जानकारी के अनुसार परिसर में रोजाना 25 हजार से अधिक मरीज और उनकी तीमारदार आते हैं। इन मरीजों का उपचार एम्स के अंसारी नगर, झज्जर, बल्लभगढ़, त्रिलोक पुरी और गाजियाबाद के परिसर में होता है। एम्स दिल्ली और एनसीआई झज्जर से जुड़े हुए कई अन्य बड़े केंद्र भी हैं। यहां संबंधित रोग का उपचार होता है। इसके अलावा यहां काफी सारे प्रयोगशाला, परामर्श कक्ष, ऑपरेशन कक्ष सहित 58 से अधिक विभाग हैं। इनकी पूरी जानकारी न तो सभी स्टाफ को हैं और न अन्य को ऐसे में कोई व्यक्ति सही से जानकारी नहीं दे पाता।

नेविगेशन देगा पूरी जानकारी
एम्स में तैयार होने वाले इनडोर नेविगेशन प्रणाली से एम्स परिसर के भीतर की पूरी जानकारी वास्तविक समय दिशा-निर्देश के साथ मिल सकेगी। यह कर्मचारियों को अधिक कुशल बनाने और रोगियों या आगंतुकों के खो जाने के जोखिम को कम करने में भी सक्षम होगा।

भारतीय भाषा में देगा जानकारी
आदेश में कहा गया है कि नेविगेशन में भारतीय भाषा में जानकारी दी जानी चाहिए। विशेष रूप से हिंदी भाषा में। यह नेविगेशन सुलभ और सक्षम होना चाहिए। साइबर खतरों से भी सुरक्षित होना चाहिए। यह एप फोन पर आसानी से उपलब्ध होना चाहिए। नेटवर्क न होने पर बेहतर ढंग से काम करना चाहिए।  फोन ऑफ़लाइन मोड में हो।
 

यह होगी समिति
न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. विवेक टंडन की अध्यक्षता में बने समिति में डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. विकास, अधीक्षण अभियंता, एम्स और सतीश शामिल रहेंगे। यह समिति सात दिनों में संबंधित कंपनी से आवेदन मांगकर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे। साथ ही बताएंगे कि सिस्टम कैसे एम्स के लिए फायदेमंद हो सकता है।
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अभी सुरक्षा गार्ड पर रहते हैं निर्भर
एम्स में एक जगह से दूसरे जगह पर जाने के लिए मरीज व तीमारदार सुरक्षा गार्ड पर निर्भर होते हैं। यदि मरीज को गार्ड की बात समझ में नहीं आती तो वह दिनभर एक जगह से दूसरी जगहों पर भटकता रहता है। इसके अलावा कई बार भाषा की भी समस्या आती है। कई बार मरीज गार्ड को सही से समझा नहीं पाते। ऐसे में यह सिस्टम काफी मददगार साबित होगा, जो सभी भारतीय भाषाओं में जानकारी देगा।
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