भारत में क्षेत्रीय भाषाओं के अनुवादकों की मांग है।
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डिजिटल युग में अनुवाद की आवश्यकता बढ़ गई है। वर्तमान में भारत में क्षेत्रीय भाषाओं के अनुवादकों की मांग है। इसका कारोबार 2030 तक 8,120 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। एआई का प्रयोग होने से अनुवाद में समय की बचत होती है। यह कम समय में शाब्दिक अनुवाद तो कर देता है, लेकिन भावार्थ निकालने में पीछे है। हालांकि, जेनरेटिव एआई इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।
अनुवादक प्रक्रिया में मानव बुद्धिमत्ता का प्रयोग करना आवश्यक बताते हैं। वे ही शब्दों के बीच का अनुवाद लंबे अनुभव और अनुभूति से कर सकते हैं। यही वजह है कि साहित्य और कलात्मक अनुवाद में अब भी मानव आगे हैं। अनुवाद दो तरह का होता है। कलात्मक और गैर-कलात्मक। विशेषज्ञ बताते हैं कि कलात्मक अनुवाद में अभी भी मनुष्य की डिमांड है। जबकि तकनीकी अनुवादक एआई की मार झेल रहे हैं। दरअसल, एआई रचनात्मक लेखन का अनुवाद करने में अभी भी पीछे है।
सोशल मीडिया एक्सपर्ट अंकित लाल का कहना है कि एआई किसी उपन्यास को पूरा अनुवाद कर देगा। लेकिन उसमें भाव रह जाएंगे। हालांकि, यही अनुवाद करने के लिए पहले मनुष्य को अरसा लग जाता था। ये काम एआई कम समय में कर देता है।
इससे मनुष्य को अनुवाद टाइप नहीं करना पड़ता। बाद में उसे बस भावार्थ निकालकर मोडिफाई करना पड़ता है। एआई ने आउटपुट की प्रक्रिया को तेज किया है। पिछले कई सालों से भारत में क्षेत्रीय भाषाओं के अनुवादकों की मांग में तेजी देखी गई है। स्टेटिस्टा की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में भाषा अनुवाद एनएलपी बाजार का आकार वर्तमान में करीब 2,092 करोड़ रुपये है। बाजार का आकार 25.35 फीसदी की वार्षिक वृद्धि दर से 2030 तक करीब 8,120 करोड़ रुपये हो जाएगा। उम्मीद हैं कि जल्द ही इस क्षेत्र में और नवीनतम तकनीक के प्रयोग होंगे।
वैश्विक उद्योग भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं में दर्ज करा रहे अपनी उपस्थिति
- विशेषज्ञ बताते हैं कि मेक इन इंडिया अभियान, स्मार्टफोन की उच्च दर और डिजिटल परिवर्तन के कारण वैश्विक उद्योग भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
अनुवाद में मनुष्य की बुद्धिमत्ता का ही प्रयोग किया जाना चाहिए। वर्तमान में केवल तकनीकी अनुवादक एआई की मार झेल रहा है। साहित्य के अनुवाद में या किसी कलात्मक अनुवादक में अभी भी मनुष्य आगे है। एआई केवल शब्दों का अनुवाद करने में सक्षम है, शब्दों के बीच का अनुवाद लंबा अनुभव और अनुभूति ही कर सकती है।
-गीत चतुर्वेदी, कवि, लेखक व अनुवादक