द्वारका सेक्टर 23 इलाके में स्थित आश्रय गृह से फरार हुई युवतियों की पहचान के लिए दिए गए विज्ञापन में मेट्रो के आश्रय गृह का जिक्र आने से दिल्ली पुलिस और मेट्रो आमने सामने आ गई। मेट्रो की ओर से विज्ञप्ति जारी कर कहा गया कि तीस हजारी स्थित चिल्ड्रन होम से कथित तौर पर 10 लड़कियों के अपहरण पर दिल्ली पुलिस द्वारा एक विज्ञापन जारी किया गया है। सलाम बालक ट्रस्ट द्वारा संचालित बाल गृह में केवल लड़के रहते हैं। डीएमआरसी का चिल्ड्रन होम की इस घटना से कोई संबंध नहीं है। मेट्रो का बयान आने के बाद दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मानवीय चूक इस मामले में हुई है। इसे सही करवा दिया जाएगा।
द्वारका जिला पुलिस उपायुक्त संतोष कुमार मीणा ने बताया कि 19 मार्च को कमला मार्केट स्थित जीबी रोड से पुलिस ने 12 युवतियों को मुक्त कराया था। मुक्त कराई गई युवतियों को द्वारका सेक्टर 23 स्थित आश्रय गृह में रहने के लिए भेजा गया था। सभी युवतियां आश्रय गृह की तीसरी मंजिल पर रह रही थी। 24 मई को सभी युवती एग्जास्ट फेन के लिए छोड़ी गई जगह से कपड़े की रस्सी बनाकर निकल भागी। इस दौरान दो युवती नीचे गिरने से घायल भी हो गई। घायल युवतियों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इलाज करवाने के बाद उन लड़कियों को दूसरे आश्रय गृह में भेज दिया गया और पुलिस ने आश्रय गृह के अधिकारियों की शिकायत पर अपहरण का मामला दर्ज कर लिया। बाद में उस आश्रय गृह को बंद करवा दिया गया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पुलिस फरार युवतियों की तलाश के लिए उनका विज्ञापन दिया गया था। जिसमें किसी तरह की कोई आपत्ति नहीं है। इस विज्ञापन में भूलवश तीस हजारी स्थित डीएमआरसी चिल्ड्रेन होम छप गया है। जिसे सुधार दिया जाएगा।