-मानसिक तनाव के चलते 250 दिन हुई थी देरी
-मामला प्रिया मेहरोत्रा और टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से जुड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। पति की मौत के बाद क्लिनिकल डिप्रेशन से जूझ रही महिला को उपभोक्ता शिकायत दर्ज करने में हुई 250 दिन की देरी के मामले में दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने राहत दी है। आयोग ने देरी को माफ करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग को शिकायत पर दोबारा सुनवाई करने और तीन महीने के अंदर फैसला देने का निर्देश दिया है। यह मामला प्रिया मेहरोत्रा और टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से जुड़ा है। प्रिया के पति सौरभ मेहरोत्रा के पास 20 लाख रुपये की बीमा राशि वाली मेडिक्लेम पॉलिसी थी, जिसमें पति-पत्नी दोनों शामिल थे। अगस्त 2021 में सौरभ की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 27 अक्तूबर 2021 को उनका निधन हो गया। इलाज पर 25.73 लाख रुपये खर्च हुए थे। प्रिया ने बीमा कंपनी से इस रकम की भरपाई मांगी, लेकिन कंपनी ने दावा खारिज कर दिया। कंपनी का कहना था कि लिवर की बीमारी सिरोसिस के इलाज के लिए पॉलिसी में दो साल की प्रतीक्षा अवधि थी। बीमा कंपनी के शिकायत निवारण विभाग से भी राहत नहीं मिलने पर प्रिया ने बीमा लोकपाल का दरवाजा खटखटाया। 31 जनवरी 2023 को लोकपाल ने भी उनके खिलाफ फैसला दिया। इसके बाद प्रिया ने सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई और इलाज के खर्च की भरपाई के साथ मुआवजे व कानूनी खर्च की मांग की।
मेडिकल दस्तावेजों को माना अहम
राज्य उपभोक्ता आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की पीठ ने मेडिकल पर्चों और अन्य रिकॉर्ड पर गौर किया। आयोग ने माना कि दस्तावेज महिला के डिप्रेशन के इलाज की पुष्टि करते हैं और शिकायत दर्ज करने में हुई देरी के लिए यह पर्याप्त कारण है। आयोग ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास तय समय में शिकायत या अपील दाखिल नहीं कर पाने का उचित कारण हो, तो देरी माफ की जा सकती है। इसी आधार पर आयोग ने 250 दिन की देरी को माफ कर दिया और जिला उपभोक्ता आयोग (पश्चिम) को निर्देश दिया कि वह मामले की खूबियों और तथ्यों के आधार पर तीन महीने के भीतर फैसला करे।