दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 करोड़ रुपये के मानहानि मामले की सुनवाई में तेजी लाने के एकल पीठ के फैसले पर सवाल उठाने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की भर्त्सना की है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यह पहला मौका है जब कोई पक्षकार जल्दी सुनवाई के आदेश पर आपत्ति जता रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने केजरीवाल एवं अन्य पांच आप नेताओं के खिलाफ यह मुकदमा दर्ज कराया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और जस्टिस सी हरिशंकर की पीठ ने 26 जुलाई के एकल पीठ के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने के लिए आप नेता आशुतोष की भी खिंचाई की है। पीठ ने कहा कि सुनवाई में देरी के लिए उसे सुप्रीम कोर्ट को जवाब देना पड़ता है। लिहाजा, एकल पीठ के जज को त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
कोर्ट ने केजरीवाल के वकील से पूछा कि वह ऐसी अपील क्यों दाखिल कर रहे हैं और क्या वह अपने मुवक्किल को अपील दायर करने के बजाय इस केस को खत्म करने की सलाह नहीं देते हैं? केजरीवाल के वकील ने दलील दी कि ऐसे समय में जब सबूतों की रिकॉर्डिंग हो रही है, एकल जज इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं।
जेटली के वकीलों ने विरोध करते हुए कहा कि केजरीवाल की ओर से यह अपील केस को लंबा खींचने के लिए दायर की गई है। केजरीवाल के अलावा इस मामले में आप नेता राघवेंद्र चड्ढा, कुमार विश्वास, आशुतोष, संजय सिंह और दीपक बाजपेयी आरोपी हैं।
इन लोगों ने दिसंबर, 2015 में जेटली पर 2000-2013 तक दिल्ली डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) के अध्यक्ष रहते भ्रष्टाचार में लिप्त करने का आरोप लगाया है। जेटली ने इन आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया है कि आप नेताओं ने उनके खिलाफ झूठे और अपमानजनक आरोप लगाए हैं।
केजरी पर मानहानि का एक और केस
डीडीसीए मानहानि मामले में सुनवाई के दौरान केजरीवाल के वकील द्वारा जेटली के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री पर 22 मई, 2017 को जेटली ने 10 करोड़ रुपये की मानहानि का एक और केस दर्ज कराया है।