अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में वन्यजीवों की निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि दर्शकों के लिए बनाए गए एरिना क्षेत्र में एक पांडा हिरण का शव छह दिन से अधिक समय तक पड़ा रहा, लेकिन कर्मचारियों को इसकी जानकारी नहीं हुई। छुट्टी से लौटे बीट प्रभारी ने मंगलवार को हिरण का क्षत-विक्षत शव देखा, जिसके बाद मामला सामने आया। बताया गया कि बारिश के कारण शव फूल गया था और उसके काफी हिस्से को चील, नेवले, जंगली बिल्ली और दूसरे जानवर खा चुके थे। शव को बाद में चिड़ियाघर के वेटनरी अस्पताल भेजा गया।
बीट नंबर-1 के बाड़े में करीब 60 हिरण हैं। यहां तैनात कर्मचारियों की जिम्मेदारी होती है कि एरिना में भेजे गए और वापस बाड़े में लाए गए हिरणों की संख्या का रिकॉर्ड रखें। सूत्रों के मुताबिक, बीट प्रभारी के छुट्टी पर रहने के दौरान तैनात एमटीएस असिस्टेंट ने यह रिकॉर्ड नियमित रूप से नहीं रखा। इसी वजह से एक हिरण के कम होने की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी। हिरण की मौत कैसे हुई, यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। शव काफी खराब हो जाने के कारण पोस्टमॉर्टम में भी परेशानी आ रही है। मामले को लेकर कर्मचारियों के बीच कहासुनी भी हुई। चिड़ियाघर के निदेशक डॉ. संजीत कुमार ने कहा कि वन्यजीवों का संरक्षण और रखरखाव प्रशासन की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।