औद्योगिक नगरी के लोग कर्ज लेने में पीछे नहीं हैं। इंडस्ट्रियल, एग्रीकल्चर, कॉरपोरेट्स और सर्विस सेक्टर 18,600 करोड़ रुपये का कर्जदार है। यह आंकड़े जिले के 44 सरकारी, अर्ध सरकारी और निजी बैंकों पर आधारित हैं।
बैंकों के लिए चिंता का विषय करीब 2000 करोड़ रुपया एनपीए (नॉन परफोरमिंग एसेट्स) यानि कर्जदारों में फंसी हुई रकम है। जिसे निकालने के लिए अब बैंक प्रशासन की मदद लेने की तैयारी में हैं।
विजय माल्या केस के बाद औद्योगिक नगरी के बैंक अब बकायदारों से रिकवरी की कवायद में जुट गए हैं। बाकायदा, बकाया वसूली की प्रक्रिया को तेज करने के लिए कमेटियां गठित करने की तैयारी की जा रही हैं। बैंकों पर शिकंजा कसने के लिए जिला प्रशासन से भी मदद ली जाएगी।
इसके लिए जल्द ही बैंकर्स एक बैठक करने जा रहे हैं। लीड बैंक मैनेजर इंद्रमोहन शर्मा बताते हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर रिजर्व बैंक ने 15 से 18 प्रतिशत एनपीए घोषित किया था। जिले में कम से कम 10-12 प्रतिशत एनपीए माना जा रहा है। यानि 1800 से 2000 करोड़ रुपया ऐसा है जो आने वाले समय में डूब सकता है।
यहां कर्ज डूबने की आशंका
बैंकों के अनुसार सबसे ज्यादा कर्जा मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर में डूबने की आशंका रहती है, क्योंकि ऋण लेने के बाद घाटा दिखाकर इकाइयों को दिवालिया घोषित कर दिया जाता है। फरीदाबाद में एक बड़े उद्योग में ऐसा ही मामला सामने आया था। सर्विस सेक्टर से जुड़े कर्जदार समय पर पैसा वापस नहीं देते या फिर गलत तरीके से कर्ज ले लेते हैं।
मैनुफेक्चरिंग सेक्टर सबसे बड़ा कर्जदार
फरीदाबाद को मैनुफेक्चरिंग हब कहा जाता है। कर्ज लेने के मामले में यह सेक्टर सबसे आगे है। मैन्युफेक्चरिंग सेक्टर पर सबसे ज्यादा 7000 करोड़ रुपया बैंकों का कर्ज है। इसके बाद 2600 करोड़ रुपये सर्विस सेक्टर (होम लोन, एजुकेशन लोन, व्हीकल लोन आदि) पर है। 682 करोड़ एग्रीकल्चर सेक्टर को कर्ज के रूप में दिया हुआ है। इसके अलावा बाकी 8 हजार करोड़ का कर्जा कॉरपोरेट सेक्टर पर है। इनमें बड़े उद्योगों से लेकर बड़े संस्थान भी शामिल हैं। जिन बैंकों ने कर्जा दे रखा हैं उसमें 25 सरकारी बैंक और 16 निजी बैंक हैं। सिडबी (स्मॉल इंडस्ट्री डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया) ने भी 800 करोड़ का कर्जा दिया हुआ है।
इन बैंकों का सबसे ज्यादा कर्ज
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया 2625 करोड़
आईसीआईसीआई 2400 करोड़
एक्सिस बैंक 1045 करोड़
एचडीएफसी बैंक 1805 करोड़
सिंडीकेट बैंक 1000 करोड़
पंजाब नेशनल बैंक 1000 करोड़
कैनरा बैंक 1525 करोड़
बैंक ऑफ इंडिया 950 करोड़
जिले के बैंकों का 18,600 करोड़ रुपये बतौर कर्ज बंटा हुआ है। ये आंकड़े दिसंबर 2015 तक के हैं। बैंकर्स का पैसा डूबे, न इसको ध्यान में रख कदम उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही निगरानी कमेटी भी गठित की जाएगी।- इंद्रमोहन शर्मा, लीड बैंक मैनेजर