सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली गैंगरेप केस के चार दोषियों में से दो को फांसी देने के मामले में 14 अप्रैल तक के लिए स्थगन आदेश जारी किया है।
राजधानी में 16 दिसंबर, 2012 को मेडिकल छात्रा के साथ हुए सामूहिक बलात्कार कांड के इन दो अभियुक्तों को फांसी देने से पहले अदालत ने कुछ दस्तावेज तलब किए हैं।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 15 मार्च और फिर 7 अप्रैल को अभियुक्त मुकेश और पवन गुप्ता की फांसी की तारीख आगे बढ़ाने का फैसला दिया था।
हाईकोर्ट ने दी थी फांसी की सजा
सर्वोच्च अदालत की जस्टिस बी.एस. चौहान और जस्टिस जे चेलामेश्वर की बेंच ने कहा कि मौजूदा अंतरिम आदेश 14 अप्रैल तक जारी रहेगा।
अभियुक्तों के वकील एमएल शर्मा इस तारीख तक सिंगापुर के उस अस्पताल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पेश करेंगे, जहां बलात्कार की शिकार युवती को इलाज के लिए ले जाया गया था। अदालत ने 31 मार्च को निचली अदालत के रिकॉर्ड भी मांगे थे।
गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने मुकेश और पवन के अलावा अक्षय ठाकुर और विनय शर्मा की फांसी की सजा का भी समर्थन किया।
'दुर्लभतम केस है दिल्ली गैंगरेप'
हाईकोर्ट ने इस मामले को दुर्लभतम करार दिया था और कहा था कि देश में आपराधिक मामलों के फैसले के लिए स्थापित न्यायिक व्यवस्था के सामने ऐसा उदाहरण पहले कभी नहीं आया था।
यह दुर्लभतम मामला है और ऐसा शायद ही कोई मामला आगे आएगा। गौरतलब है कि राजधानी दिल्ली में 16 दिसंबर, 2012 को एक 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ छह लोगों ने चलती बस में गैंगरेप किया था।
गैंगरेप पीड़िता की सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। छह अभियुक्तों में से एक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।