दिल्ली डॉक्टर्स एसोसिएशन ने दिल्ली सरकार से अपील की है कि डॉ. जोगिंदर को कोरोना योद्धा घोषित किया जाए। साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जाए। एम्स अस्पताल के डॉ. विजय गुर्जर ने कहा कि जोगिंदर काफी सहज और सरल व्यक्ति थे। एक छोटे से गांव से उन्होंने दिल्ली तक का सफर तय किया था। किसान परिवार से होने के चलते आर्थिक हालात ज्यादा अच्छे नहीं थे। पिता ने लोन लेकर उनकी पढ़ाई पूरी कराई थी। 27 साल की छोटी उम्र में डॉक्टर भी बन गए थे।
कर्तव्य निभाते हुए उन्होंने अपना बलिदान दिया है। डॉक्टरों की सरकार से मांग है कि उन्हें कोरोना योद्धा घोषित कर परिजनों को मुआवजा दिया जाए। जोगिंदर की बीमारी के बारे में जानकारी मिलने के बाद 29 जून को उनके पिता मध्य प्रदेश से दिल्ली आ गए थे। बेटे की मौत से परिजनों का बुरा हाल है। उन्होंने प्रधानमंत्री से भी मदद की गुहार लगाई है।
डॉक्टरों ने चंदा इकट्ठा कर कराया इलाज
सर गंगाराम अस्पताल में डॉ. जोगिंदर का तीन लाख से अधिक रुपये का बिल आ गया था। आर्थिक स्थिति ठीक न होने के चलते उनके परिजन इलाज नहीं करा पा रहे थे। ऐसे में अन्य अस्पतालों के डॉक्टरों ने 3 लाख रुपये का चंदा इकट्ठा किया और उनके उपचार में सहयोग किया। राजधानी के विभिन्न अस्पतालों में अब तक करीब 24 स्वास्थ्य कर्मियों की संक्रमण से मौत हो चुकी है। तीन दिन पहले डॉ. जावेद की भी मौत हुई थी। इससे भी पहले लोकनायक अस्पताल में सीनियर कंसलटेंट और आइसीयू इंचार्ज डॉ. असीम गुप्ता की भी कोरोना से जान जा चुकी है।