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Cyber crime: 75 साल के रिटायर्ड मैनेजर को तीन दिन रखा डिजिटल अरेस्ट, 35 लाख रुपए ऐंठ लिए; जांच शुरू

Wed, 15 Jul 2026 06:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा

सार

ठगों ने खुद को सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर व्हाट्सएप कॉल के जरिए उन्हें लगातार अपने नियंत्रण में रखा।
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cyber crime - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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साइबर जालसाजों ने 75 वर्षीय जीवन बीमा कंपनी के सेवानिवृत मैनेजर को सरकारी जांच और गिरफ्तारी का डर दिखाकर तीन दिन तक मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और आखिरकार उनसे 35 लाख रुपये ऐंठ लिए। ठगों ने खुद को सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर व्हाट्सएप कॉल के जरिए उन्हें लगातार अपने नियंत्रण में रखा। भय और तनाव के माहौल में बुजुर्ग ने जांच में सहयोग समझकर आरटीजीएस के माध्यम से रकम जालसाजों के बताए बैंक खातों में भेज दी। मामले में साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

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सेक्टर-78 स्थित हाइड पार्क सोसाइटी निवासी पीड़ित बुजुर्ग ने पुलिस को बताया कि दो जुलाई को उनके पास व्हाट्सएप कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को एक सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि उनके नाम पर गंभीर वित्तीय अपराध की जांच चल रही है। उसने धमकी दी कि यदि उन्होंने अधिकारियों के निर्देशों का पालन नहीं किया तो उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

गिरफ्तारी के डर से सहमे बुजुर्ग को ठगों ने दो से चार जुलाई तक लगातार व्हाट्सएप कॉल पर बनाए रखा। इस दौरान उन्हें किसी से भी बातचीत न करने और पूरे मामले को गोपनीय रखने के निर्देश दिए गए। लगातार मानसिक दबाव और भय के कारण वह किसी से सलाह तक नहीं ले सके। आरोपियों ने जांच में सहयोग का हवाला देकर उनके बैंक खाते से आरटीजीएस के जरिए 35 लाख अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए। 
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परिवार को हुआ संदेह
कुछ समय बाद जब पूरे घटनाक्रम पर उन्हें संदेह हुआ तो उन्होंने अपने परिवारीजन को इसकी जानकारी दी। परिवारीजन से बातचीत के बाद उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर शिकायत दर्ज कराई।

जानकारी जुटा रही पुलिस
डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि मामले में साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस संबंधित बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जानकारी जुटा रही है। धनराशि के लेन-देन की जांच की जा रही है और संबंधित बैंक से समन्वय कर रकम को ट्रेस करने का प्रयास किया जा रहा है।

ऐसे फंसाते हैं जाल में
ठग खुद को सीबीआई, ईडी, पुलिस, आरबीआई, ट्राई या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर वीडियो या व्हाट्सएप कॉल करते हैं। फर्जी दस्तावेज दिखाकर गिरफ्तारी का भय पैदा किया जाता है। पीड़ित को घंटों तक कॉल पर रखकर मानसिक दबाव बनाया जाता है और जांच या सत्यापन के नाम पर ठगी करते हैं।

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