गुरु और शिष्य का नाम आने पर सबसे पहले लोगों के जेहन में एकलव्य का नाम जरूर उठता है। महाभारत में एकलव्य ने द्रोणाचार्य की मूर्ति बना कर धनुष विद्या ग्रहण की। उस शिष्य के अंगूठे को दबाने वाली समाधि पर लाखों लोगों की भावना जुड़ी है।
उसके दर्शन करने एकलव्य के मंदिर में माथा ठेकने वाले श्रद्वालु कोलकता से भी आते हैं। मंदिर भवन, धर्मशाला व परिसर का रख रखाव तक करने वाला कोई नहीं है। सैकड़ों करोड़ का बजट पास करने वाला नगर निगम चाहे तो इस परिसर को चमका दें, लेकिन अब तक ऐसा कुछ नहीं किया गया। बुधवार को अमर उजाला ने एकलव्य के मंदिर का जायजा लिया। पेश है लाइव रिपोर्ट।
समय: 8:30 बजे, स्थान-खांडसा गांव
महाभारत में खांडा वन के नाम से जाने जाना वाला स्थान अब खाड़सा गांव के रूप में जाना जाता है। एकलव्य के मंदिर में दो महिलाएं पूजा कर रही हैं। मंदिर के चबूतरे को धो कर अगरबत्ती जला रही हैं। इसे दादा नोईया मठ के नाम से जाना जाता है। इसकी देखभाल करने वाली मुन्नी देवी कहती हैं कि गांव से लेकर सरकार तक कोई नहीं है इसकी सुध लेने वाला।
समय: 8:50, स्थान- एकलव्य के मंदिर का मैदान
-गांव पंचायत की ओर से दो बीघा जमीन मंदिर के नाम पर है। राजकीय स्कूल के प्रांगण से सटा हुआ मैदान। पूरे मैदान में धूल इस कदर है कि पैदल नहीं चला जा सकता है।
इसे भी जानें..
: रविवार व बृहस्पतिवार को भक्तों की भीड़ होती है।
: नोईया समाज के लोग कोलकता से लेकर अन्य प्रदेशों से भी दर्शन के लिए आते हैं।
: धर्मशाला के नाम पर दो कमरे हैं। एक कमरा गांव पंचायत ने बनवाया था दूसरा कमरा आटो पार्ट कंपनी ने बनाया।
: मंदिर के भीतर तो लाईट है पर बाहर लाइटिंग का कोई इंतजाम नहीं है।
: दूर-दूर से जो लोग शीतला माता मंदिर आते हैं। उनमें से कुछ भक्त यहां भी पहुंचते हैं।
गुडग़ांव का नाम बदलकर गुरुग्राम करने का मैं स्वागत करता हूं मगर सरकार व प्रशासन की नजर इस पर पड़ जाए तो खांडसा गांव की तस्वीर बदल जाएगी। -रघुबीर सिंह राघव, खाड़सा गांव ।