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संकट: स्मॉग की चादर में और घुटेगी दिल्ली, दो दिन गंभीर श्रेणी में रह सकती है हवा, स्वास्थ्य के लिए बढ़ी चुनौती

Sun, 08 Nov 2026 05:47 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

आने वाले दिनों में सुबह के समय हल्के से मध्यम कोहरे की संभावना है। इसके साथ ही हवा की गति कम होने और प्रदूषकों के फैलाव के लिए मौसम अनुकूल नहीं रहने से जहरीले कण वातावरण में बने रह सकते हैं।
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दिल्ली का अक्षरधाम मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोहरा और हवा की धीमी रफ्तार प्रदूषण की परेशानी बढ़ा सकती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले दो दिन वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में रह सकती है। आने वाले दिनों में सुबह के समय हल्के से मध्यम कोहरे की संभावना है। इसके साथ ही हवा की गति कम होने और प्रदूषकों के फैलाव के लिए मौसम अनुकूल नहीं रहने से जहरीले कण वातावरण में बने रह सकते हैं। से हालात स्वास्थय के बड़ी चुनौती हैं। 

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वहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, शनिवार शाम चार बजे दिल्ली का औसत एक्यूआई 369 दर्ज किया गया, जबकि शुक्रवार को यह 382 था। यानी एक दिन में 13 अंक का सुधार हुआ। हालांकि, 16 निगरानी केंद्रों पर एक्यूआई गंभीर श्रेणी में रहा। दिवाली की पूर्व संध्या पर शहर धूम कोहरा की आगोश में लिपटा रहा और दृश्यता कम हो गई। दिल्ली का औसत एक्यूआई गंभीर श्रेणी की 401 की सीमा से नीचे होने के बावजूद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रैप का तीसरा चरण लागू कर दिया है।

10 को बहुत खराब श्रेणी में लौट सकती है हवा 
भारत मौसम विज्ञान विभाग के सात नवंबर के बुलेटिन के मुताबिक, आठ और नौ नवंबर को दिल्ली की हवा गंभीर श्रेणी में रहने का अनुमान है। इसके बाद 10 नवंबर को हवा के बहुत खराब श्रेणी में लौटने की संभावना है। अगले छह दिनों के पूर्वानुमान में भी वायु गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में रहने की आशंका जताई गई है।  मौसम विभाग के पूर्वानुमान में आठ नवंबर को वेंटिलेशन इंडेक्स 2,500 वर्ग मीटर प्रति सेकंड और नौ नवंबर को 3,500 वर्ग मीटर प्रति सेकंड रहने की संभावना जताई गई है। विभाग के मुताबिक, 6,000 से कम वेंटिलेशन इंडेक्स और 10 किलोमीटर प्रतिघंटा से कम औसत हवा की रफ्तार प्रदूषकों के फैलाव के लिए प्रतिकूल होती है। यानी आने वाले दिनों में हवा में मौजूद प्रदूषक कणों के छंटने की संभावना कम रहेगी।
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गंभीर इलाकों की संख्या घटी आईआईटी दिल्ली सबसे प्रदूषित
दिल्ली की हवा में मामूली सुधार हुआ है, लेकिन प्रदूषण अब भी है। चार नवंबर के मुकाबले सात नवंबर को गंभीर श्रेणी वाले निगरानी केंद्रों की संख्या 22 से घटकर 19 रह गई। हालांकि, बहुत खराब श्रेणी वाले केंद्र 32 से बढ़कर 35 हो गए।

सीपीसीबी के आंकड़ों के मुताबिक, शनिवार को दिल्ली का औसतन एक्यूआई 369 रहा। यह बेहद खराब श्रेणी में गिना जाता है। इसके अलावा 59 में से 54 निगरानी केंद्रों पर हवा बहुत खराब या गंभीर श्रेणी में रही। किसी भी केंद्र पर हवा मध्यम या संतोषजनक स्तर पर दर्ज नहीं की गई। सबसे कम एक्यूआई लोधी रोड में 258 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में है।

आईआईटी दिल्ली में पीएम-10 रहा प्रमुख प्रदूषक
सात नवंबर को आईआईटी दिल्ली 450 एक्यूआई के साथ सबसे प्रदूषित केंद्र रहा। यहां पीएम-10 प्रमुख प्रदूषक दर्ज किया गया। इसके बाद पंजाबी बाग (439), जहांगीरपुरी (427), विवेक विहार (426), मुंडका और रोहिणी (दोनों 424) और आरके पुरम में 422 का स्थान रहा। इन केंद्रों पर पीएम-2.5 प्रमुख प्रदूषक रहा। बवाना में 420, सिरीफोर्ट और सोनिया विहार में 418 एक्यूआई दर्ज किया गया।

नजफगढ़ और चांदनी चौक में बढ़ा प्रदूषण
नजफगढ़ और चांदनी चौक जैसे इलाकों में प्रदूषण बढ़ा है। दोनों जगह का एक्यूआई क्रमश: 411 और 397 दर्ज किया गया। चार नवंबर के मुकाबले सात नवंबर को नजफगढ़ में 32 व चांदनी चौक में 31 अंकों की बढ़ोतरी हुई है। कैंटोनमेंट क्षेत्र में भी एक्यूआई 295 से बढ़कर 327 पहुंच गया।

जहांगीरपुरी में 22 अंक की राहत, आनंद विहार भी सुधरा जहांगीरपुरी का एक्यूआई 449 से घटकर 427, बुराड़ी क्रॉसिंग का 407 से 386 और आनंद विहार का 298 से 276 पर आ गया। डीटीयू में भी 434 से घटकर 416 और मुंडका में 439 से 424 एक्यूआई दर्ज हुआ। इस हिसाब से इन इलाकों की हवा सुधरी है।

दूसरे राज्यों के गैर बीएस-6 मानक वाले वाहनों पर हर साल रहेगा प्रतिबंध
दिल्ली सरकार ने शनिवार को कहा कि वह अन्य राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में पंजीकृत बीएस-6 उत्सर्जन मानकों से नीचे के वाहनों पर हर साल एक नवंबर से 31 जनवरी के बीच प्रतिबंध लागू करेगी। सरकार ने सर्दियों के मौसम के लिए अपनी कार्य योजना के तहत इस साल की उक्त अवधि के लिए दिल्ली के बाहर पंजीकृत ऐसे मोटर वाहनों के परिचालन प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है, जो बीएस-6 उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते। इस अवधि के दौरान शहर में वायु प्रदूषण सबसे अधिक होता है और हवा की गुणवत्ता सबसे खराब रहती है। इस कदम का उद्देश्य वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को सीमित करना और सड़कों पर उड़ने वाली धूल को कम करना है।

दिल्ली परिवहन विभाग की ओर से शनिवार को जारी एक सार्वजनिक अधिसूचना के अनुसार हर साल एक नवंबर से 31 जनवरी तक दूसरे राज्यों में पंजीकृत बीएस-6 और उससे नीचे के वाहनों को दिल्ली में परिचालित करने की अनुमति नहीं होगी। अधिसूचना के अनुसार, एक नवंबर 2026 से बीएस-6 और उससे नीचे के वाणिज्यिक मालवाहक वाहनों (जिनमें बड़े, मध्यम और भारी मालवाहक वाहन शामिल हैं) और बसों को दिल्ली में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। इसमें ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट और अन्य व्यवस्थाओं के तहत चलने वाली बसें भी शामिल हैं। 

अधिकारियों के अनुसार, परिवहन विभाग ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रमुख प्रवेश स्थलों, टोल प्लाजा और अत्यधिक प्रदूषण वाले स्थानों पर लगभग 250 प्रवर्तन कर्मियों को तैनात किया है, ताकि तय मानकों का पालन न करने वाले वाहनों पर सख्ती से रोक लगाई जा सके। उन्होंने बताया कि डीएनडी, रजोकरी-राष्ट्रीय राजमार्ग-48, गाजीपुर, सिंघू बॉर्डर, टीकरी, बदरपुर और अन्य प्रमुख टोल प्लाजा पर कर्मियों की तैनाती की गई है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सीएनजी या इलेक्ट्रिक वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। एक अधिकारी ने बताया कि परिवहन विभाग ने पंजाब, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों को भी पत्र लिखा है, जिसमें उनसे इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने या डीजल वाहनों को बीएस-6 मानकों में बदलने का आग्रह किया गया है। हवा की गुणवत्ता खराब होने के कारण वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली-एनसीआर में चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (ग्रेप) के तहत तीसरे चरण के आपातकालीन उपाय लागू कर दिए हैं।

राजधानी को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनाने का लें संकल्प : मुख्यमंत्री 
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली वासियों से अपील की है कि वे इस दिवाली पर खुशियां बांटने के साथ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का भी संकल्प लें। उन्होंने लोगों से निर्धारित मानकों के अनुसार ग्रीन पटाखों का इस्तेमाल करने और प्रदूषण कम करने में सहयोग करने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के साथ हर नागरिक की भागीदारी से ही दिल्ली को स्वच्छ, हरित और प्रदूषणमुक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण कम में हर नागरिक की भागीदारी भी जरूरी है। दिवाली पर पर दिल्ली वासियों को शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि त्योहार का प्रकाश हर घर में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए। उनकी सरकार की प्राथमिकता है कि कोई भी परिवार विकास की दौड़ में पीछे न छूटे। 

दिवाली पर सेहत और सुरक्षा का रखें ध्यान
दिवाली खुशियों, रोशनी और उत्साह का त्योहार है, लेकिन इस दौरान थोड़ी सी लापरवाही सेहत और सुरक्षा के लिए भारी पड़ सकती है। पटाखों से निकलने वाला धुआं और प्रदूषण जहां सांस संबंधी बीमारियों को बढ़ा सकता है, वहीं आतिशबाजी के दौरान सावधानी न बरतने पर जलने और चोट लगने का खतरा भी रहता है। खासकर अस्थमा, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के मरीजों को दिवाली के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है। डॉक्टरों की सलाह है कि त्योहार का आनंद लेते समय अपनी और परिवार के सदस्यों की सेहत को प्राथमिकता दें।

पटाखों से निकलने वाले धुएं में मौजूद हानिकारक गैसें और सूक्ष्म कण वायु प्रदूषण बढ़ाते हैं। इनके संपर्क में आने से खांसी, सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अस्थमा के मरीजों में धुएं के कारण सांस की तकलीफ और अस्थमा का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, पहले से हृदय संबंधी समस्याओं और हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे लोगों को भी प्रदूषण और तेज आवाज से परेशानी हो सकती है। बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। 

डॉक्टरों के अनुसार, अस्थमा, बीपी और शुगर के मरीजों को पटाखों के धुएं से यथासंभव दूरी बनाए रखनी चाहिए। पटाखे जलाए जाने वाले स्थानों पर जाने से बचें और घर के अंदर रहने की कोशिश करें। जरूरत पड़ने पर बाहर निकलते समय अच्छी फिटिंग वाला एन-95 मास्क पहनें। सांस के मरीज अपनी निर्धारित दवाएं और इनहेलर साथ रखें तथा डॉक्टर की सलाह के अनुसार उनका इस्तेमाल करें। सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या अन्य गंभीर लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।

घरेलू नुस्खों के बजाय लें डॉक्टर की सलाह : आतिशबाजी के दौरान हाथ, चेहरे या शरीर के किसी अन्य हिस्से में जलने अथवा चोट लगने पर तुरंत प्राथमिक उपचार करना जरूरी है। जलने वाली जगह को करीब 20 मिनट तक साफ और ठंडे बहते पानी के नीचे रखें। 

प्रदूषण का असर, कई कॉलेजों में अब ऑनलाइन चलेंगी कक्षाएं
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण का असर अब कॉलेजों की पढ़ाई पर भी दिखाई देने लगा है। हवा की बिगड़ती गुणवत्ता को देखते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के कई कॉलेजों ने ऑनलाइन कक्षाएं चलाने का फैसला किया है। कुछ कॉलेजों ने अवकाश भी घोषित किया है, ताकि विद्यार्थियों और कर्मचारियों को प्रदूषण से बचाया जा सके।

दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स ने नोटिस जारी कर कहा है कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) चिंताजनक स्तर पर है, इस कारण से 10 नवंबर को कक्षाएं ऑनलाइन हो सकती हैं। कॉलेज ने यह फैसला वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग और दिल्ली सरकार के ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के दिशा-निर्देशों के तहत लिया है। कालेज नौ नवंबर को बंद रहेगा।

इसी तरह जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज ने भी नौ नवंबर को छुट्टी घोषित की है। कॉलेज प्रशासन के अनुसार, 10 नवंबर को सभी कक्षाएं ऑनलाइन संचालित की जाएंगी। यह फैसला दिल्ली में लगातार खराब हो रही हवा और सरकारी दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

अंबेडकर कॉलेज ने दो दिन कक्षाएं ऑनलाइन चलाईं
दीपावली के दौरान पटाखों से होने वाले प्रदूषण को रोकने और विद्यार्थियों व कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डॉ भीमराव अंबेडकर कॉलेज ने दो दिन (6-7 नवंबर) ऑनलाइन कक्षाएं चलाईं। कॉलेज ने परिसर में सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण बनाए रखने के लिए यह फैसला एहतियात के तौर पर लिया था। सभी विद्यार्थियों को सख्त निर्देश दिए गए थे कि वे कॉलेज परिसर में कहीं भी पटाखे न जलाएं और न ही उनका इस्तेमाल करें।

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