बाहरी दिल्ली को सट्टेबाजों ने अपने चंगुल में जकड़ लिया है। सट्टा कारोबार का आलम यह है कि यहां हर तबके के लोग इसके माहिर खिलाड़ी हो गए हैं। पुलिस कार्रवाई में सैकड़ों सट्टेबाजों की गिरफ्तारी के बावजूद आज भी हर गली और नुक्कड़ पर सट्टे की पर्ची धड़ल्ले से काटी जा रही है।
दिल्ली के जेजे कॉलोनियों में यह धंधा काफी फल फूल रहा है। इसकी वजह से अन्य अपराधों में भी बढ़ोतरी हो रही है। सूत्रों के अनुसार सट्टे के कारोबार में चाय की दुकान वाले से लेकर रेहड़ी-पटरी लगाने वाले, बैट्री रिक्शा चलाने वाले या फिर दिहाड़ी मजदूर काफी बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
रात होते होते सट्टे का खेल अपने चरम पर पहुंच जाता है। सुबह से शाम तक खुलने वाले नंबरों की फेहरिस्त काफी लंबी होती है। लोग दिशावर, गली, फरीदाबाद, गाजियाबाद, काशीपुर, ताज, राजस्थान रॉयल, राजस्थान बाजार और डी कोलकाता के नाम पर अपना दांव लगाते हैं।
इस पर इन्हें 900 फीसदी ज्यादा रकम मिलने की बात कही जाती है, लेकिन सट्टेबाज तिकड़म करके उस नंबर का ड्रा निकालते हैं, जिस पर सबसे कम दांव लगा होता है।
सट्टा बाजार में तकनीक का हो रहा जमकर इस्तेमाल
सट्टा
आज कल सट्टा कारोबार में भी तकनीक का जबरदस्त इस्तेमाल किया जा रहा है। सट्टेबाजों को यह सुविधा भी उपलब्ध है कि एक नंबर पर मिस कॉल करते ही उनके मोबाइल पर सट्टे के दिन भर का लेखा-जोखा आ जाता है।
पुलिस सूत्रों की मानें, तो सट्टे का यह खेल बाहरी दिल्ली के मंगोलपुरी, सुल्तानपुरी, विजय विहार, शाहबाद डेयरी, समयपुर बादली, कंझावला, बेगमपुर, किराड़ी, साउथ रोहिणी, बवाना, बुध विहार, संगम विहार, त्रिनगर, बवाना, सावदा कॉलोनी, अमन विहार, किराड़ी, निहाल विहार, रघुवीर नगर, नरेला और उत्तम नगर में धड़ल्ले से चल रहा है।
पुलिस ने कुछ महीने पहले ही एक सट्टेबाज हाजी मस्तान को चांदनी महल से गिरफ्तार किया था। जो दिल्ली में बड़े स्तर पर सट्टे का कारोबार चलाता था।
उसकी गिरफ्तारी के बावजूद हाजी मस्तान के गुर्गे आज भी इस खेल को जारी रखे हुए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जहां से भी सट्टा चलने की शिकायत मिलती है, उस पर कार्रवाई की जाती है।