बुधवार की शाम को जब दिल्ली पुलिस को एक कॉल आई तो पुलिस महकमे में हलचल मच गई। फोन पर किसी ने जानकारी दी कि एक दस साल की बच्ची का कनॉट प्लेस के पास चलती बस से अपहरण कर लिया गया है।
इस सूचना के बाद पुलिस ने आनन-फानन में एक पूरे खोजी दस्ते को रात में ही बच्ची की खोज में लगा दिया पर पुलिस सभी प्रयास व्यर्थ साबित हुए। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि जो है ही नहीं उसे कैसे कोई ढूंढ सकता है।
हालांकि पुलिस ने 24 घंटे के अंदर ही अपनी जांच में यह पता लगा लिया कि बच्ची का अपहरण कभी हुआ ही नहीं था। इसके साथ ही पुलिस की जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि जिस महिला ने अपहरण हो जाने के संबंध में फोन किया था उसने झूठ बोला था।
उसने अपहरण की कहानी अपने पुराने प्रेमी को फंसाने के लिए बुनी थी। पुलिस कमिश्नर दीपक मिश्रा ने इस बात की पुष्टि की है कि युवती ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में अपना गुनाह कबूल कर लिया है।
महिला के बयान बढ़ाया पुलिस का शक
पुलिस के अनुसार यह बात बुधवार शाम करीब 6 बजे की है, जब पार्लियामेंट स्ट्रीट के पुलिस स्टेशन में पुलिस कंट्रोल रूम से एक फोन आया। एक 25 वर्षीय विकलांग महिला ने फोन पर बताया कि वो अपने एक साल के बेटे और दस साल की बेटी के साथ एक बस में सफर कर रही थी।
लेकिन जब महिला कुछ देर के लिए खिड़की से बाहर झांकने के बाद वापस देखा तो बच्ची वहां नहीं थी। महिला ने पुलिस को बच्ची का पू्रा हुलिया विस्तार से बताया।
अतिरिरक्त कमिश्लर एसबीएस त्यागी ने फोन पर जानकारी मिलते ही एफआईआर दर्ज की और एसएचओ कनॉट प्लसे की अगुवाई वाली एक टीम भी बना दी। बच्ची और अपहरण का करने वाले का स्केच बनाकर 200 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को बच्ची को खोजने के लिए तैनात कर दिया।
महिला ने अपनी शिकायत में बताया था कि बच्ची ने वैसे ही कपड़े पहने थे जैसे उसके एक साल के भाई ने पहने रखे हैं। महिला की इसी बात ने पुलिस के दिमाग में शक पैदा किया कि एक दस साल की बच्ची 1 साल के बच्चे जैसे कपड़े कैसे पहन सकती है। साथ ही महिला ने ये भी बताया कि बच्ची ने अपने भाई के जैसे ही लॉकेट पहन रखे हैं।
महिला की कोई बेटी थी ही नहीं
पुलिस ने महिला की इस जानकारी के अनुसार पूरी नई दिल्ली व सेंट्रल की खाक छान डाली। इसी बीच महिला ने कहा कि उसके पास कोई घर नहीं है, इसलिए उसे एक शेल्टर में भेज दिया गया। बृहस्पतिवार की सुबह को पुलिस ने महिला के फोन की कॉल डीटेल खंगालना शुरू कर दिया।
इस जांच में पुलिस ने पाया कि महिला के फोन पर दो मिस कॉल आई थी और उसने भोर में 3 बजे कॉल बैक किया था। इन सब जांच के बाद सामने आया कि महिला झूठ बोल रही है। महिला ने पुलिस को ये भी बताया कि दो साल पहले वह रोहिणी के रैन बसेरा में रहती थी। पुलिस को वहां के स्टाफ से पता चला कि महिला को कोई बेटी नहीं थी।
पुराने लिव-इन पार्टनर को फंसाना चाहती थी महिला
इसके बाद पुलिस ने उस नंबर पर कॉल किया जिस पर महिला ने कॉल बैक किया था। वह नंबर किसी अशोक का था, जिसने यह बात कबूल की कि वह महिला को जानता है।
इसी दौरान इंस्पेक्टर मुकेश वालिया ने इस बात की पुष्टि कर दी कि महिला बिहार की मूल निवासी है और उसे कोई बेटी नहीं है सिर्फ एक बेटा है।
जब पुलिस ने अशोक और महिला से अलग-अलग पूछताछ की तो महिला ने सारा सच कबूल कर लिया। महिला ने बताया कि वह अशोक को इसलिए फंसाना चाहती थी क्योंकि वह पहले अशोक के साथ लिव-इन पार्टनर के तौर पर रहती थी पर बाद में अशोक ने उसे घर से निकाल दिया।
पुलिस ने महिला के खिलाफ आईपीसी के सेक्शन 182 के तहत केस दर्ज किया है पर उसकी विकलांगता को देखते हुए पुलिस उसे छोड़ भी सकती है।