कविनगर पुलिस ने गोविंदपुरम से आईपीएल मैचों पर करोड़ों का सट्टा खेल रहे पांच अंतर्राज्यीय सटोरियों को गिरफ्तार किया है। सट्टेबाजी को दुबई से ऑपरेट किए जाने की चर्चा है।
ये गैंग ‘बैटिंग असिस्टेंट’ एप बनाकर ऑनलाइन सट्टा लगवा रहा था। बीकॉम पास सर्राफ और कॉल सेंटर संचालक इनके लीडर हैं। बृहस्पतिवार रात के मुंबई इंडियंस और केकेआर के मैच पर 150 लोगों ने 20 लाख रुपये सट्टा लगाया था।
एसपी सिटी अजयपाल ने बताया कि सट्टेबाजों में अनुराग गर्ग बीकॉम पास है और सर्राफ है। सौरव मित्तल दिल्ली गेट का है और कॉल सेंटर चलाता है। उसी के गोविंदपुरम स्थित फ्लैट में सट्टेबाजी का खेल चल रहा था।
इनके साथियों में गौरव नंदग्राम का है, गौरव गुप्ता और मुकेश कुमार नगर कोतवाली क्षेत्र के हैं। सर्विलांस और मुखबिर के जरिये पुलिस इन तक पहुंची। पकड़े जाने के डर से ये ठिकाना बदलते रहते थे। दिल्ली-एनसीआर ही नहीं, अन्य प्रांतों में भी पहुंच जाते थे।
इन्हें दिल्ली में सॉफ्टवेयर इंजीनियर से सट्टेबाजी के लिए 65 हजार रुपये में ‘बैटिंग असिस्टेंट’ एप बनवाया था, जो इनकेलैपटॉप में मिला। उस इंजीनियर के अलावा उन 150 लोगों की भी तलाश की जा रही है, जो सट्टा खेल रहे थे।
तीन हजार में कनेक्शन
सट्टेबाजों ने बताया कि सट्टा लगाने से पहले तीन हजार रुपये का मोबाइल कनेक्शन लेना होता है। उसे सट्टेबाजों के नंबर से कनेक्ट किया जाता है। फिर वह बोली लगा सकता है, रेट सुन सकता है।
इसके अलावा सट्टे के लिए उसे गारेंटर की भी जरूरत पड़ती है। गारेंटर वह व्यक्ति है, जो सट्टा खेल रहा है। तभी उसे ग्रुप में शामिल किया जाता है।
अब तक पकड़े 79 सट्टेबाज
पुलिस सूत्रों की मानें तो पकड़े गए सट्टेबाज तो महज प्यादे हैं, सरगना तो कोई और है। बेईमानी का यह गेम ईमानदारी से खेला जाता है, इसलिए वहां तक पहुंचना बेहद मुश्किल है।
सुबह होते ही विजेता के पास पैसे पहुंच जाते हैं। पिछले चार सालों में 79 सट्टेबाज पकड़े गए हैं। इनमें से कोई भी अब जेल में नहीं है।
कोठियों में चल रहा सट्टा
पुलिस सूत्रों का दावा है कि इस गैंग के अलावा भी कई गैंग हैं, जो आईपीएल मैचों पर सट्टेबाजी कर रहे हैं। पिछले आईपीएल के दौरान ये भी पता चला था कि शहर की कुछ कोठियों में सट्टा खेला जा रहा है।
सट्टेबाजों की नजर में चेन्नई जीतेगा आईपीएल
सट्टेबाजों ने बताया कि फिलहाल आईपीएल के इस सीजन में चेन्नई सट्टेबाजों की पहली पसंद हैै। उन्हें उम्मीद है कि वही इस सीजन की विजेता बनेगी। इसके बाद बंगलूरू की टीम है। सट्टेबाज गौरव ने बताया कि उसने फिल्म ‘जन्नत’ देखकर सट्टेबाजी शुरू की थी।
मोबाइल कांफ्रेंसिंग के जरिए लगता है सट्टा
सट्टेबाजों की मानें तो सट्टेबाजी मोबाइल कांफ्रेंसिंग के जरिये खेली जा रही है। मोबाइल पर रिकॉर्डर लगा होता है, जिसे सट्टेबाज सुनते रहते हैं।
वह बुलेटिन की तरह बोलता है। किस पर कितना सट्टा लगना है, यह भी बताता रहता है। बुलेटिन की तरह बोलने वाले मोबाइल को सट्टेबाजी की भाषा में डिब्बा कहते हैं।