मणप्पुरम गोल्ड में पांच करोड़ कीमत के गहने, नकदी लूटने का मास्टरमाइंड राहुल पुलिस के लिए पहेली बना हुआ है। पुलिस उसका कोई सुराग नहीं लगा पा रही है। वारदात में शामिल अन्य साथी भी राहुल के बारे पुलिस को कुछ ज्यादा नहीं बता सके हैं। सुराग के नाम पर पुलिस के पास राहुल की सीसीटीवी फुटेज में आई फोटो ही है। इस फोटो के जरिए पुलिस उसे कब पकड़ पाएगी कहना मुश्किल है।
मास्टरमाइंड राहुल के बारे में पुलिस को इतना ही पता चला था कि वह बिहार के दरभंगा जिले का रहने वाला है। वहां पहुंचने पर पता चला कि राहुल 12 साल पहले ही घर से भाग गया था।
आठ साल बाद एक बार वापस आया भी लेकिन कुछ दिन रुकने के बाद फिर भाग गया था। तब से कहां है किसी को कुछ पता नहीं है। वारदात में शामिल अन्य साथी भी राहुल के बारे में पुलिस को कुछ ज्यादा नहीं बता सके। वेटर, ऑटो चलाने या ऐसे ही छोटे मोटे काम करने वाले इन लोगों की दोस्ती राहुल से कुछ समय पहले ही हुई थी। वह कहां रहता है किसी को नहीं मालूम।
गोल्ड लोन कार्यालयों को लूटने की योजना उसने ही बनाई थी। इन लोगों को ढेर सारा धन, सोना मिलने की लालच दे साथ में शामिल कर वारदात को अंजाम दिया। वारदात को अंजाम दे सभी अलग हो गए, राहुल कहां गया किसी को नहीं पता।
सर्विलांस आदि की मदद से पुलिस ने वारदात में शामिल छह सदस्यों को तो गिरफ्तार कर लिया लेकिन राहुल को पता नहीं लगा पा रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक राहुल मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता, करीब बारह साल से वह परिवार के संपर्क में भी नहीं है।
वह कहां रहता था इसकी भी ठोस जानकारी पुलिस को नहीं मिल सकी है। पकड़े गए साथियों ने जिन लोगों से संपर्क होने की जानकारी दी वह भी राहुल के बारे में कुछ ज्यादा जानकारी नहीं दे सके।
मालूम हो कि राहुल और उसके गैंग ने नोएडा और गाजियाबाद में भी गोल्ड लोन कार्यालय लूटने का प्रयास किया था। वारदात में शामिल छह आरोपी तो पकड़े जा चुके हैं, राहुल की खोज में फरीदाबाद, दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद की पुलिस भी जुटी है। घूमंतू जिंदगी बिता रहे राहुल को तलाशना पुलिस के लिए अंधेरे में निशाने पर तीर चलाने जैसा है।