दिल्ली हाईकोर्ट ने सातवीं की छात्रा से दुष्कर्म में दोषी पप्पू सिंह को राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने रोहिणी अदालत से मिली आजीवन कारावास की उसकी सजा को बरकरार रखा। न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजयोग व न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की खंडपीठ ने एक अगस्त को दिए फैसले में कहा उनकी नजर में अपराध को देखते हुए यह कठोर सजा नहीं है।
पप्पू ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। खंडपीठ कहा कि याची पीड़ित समेत व अन्य छात्राओं को ऑटो से स्कूल लाने-ले जाने का काम करता था।
10 अप्रैल 2012 को उसने बाहरी दिल्ली निवासी छात्रा से रेप किया और इसके बाद धमकी देकर लगातार 20 से 25 दिन दुष्कर्म किया, जिससे वह गर्भवती हो गई। शादीशुदा होने के नाते याची जानता था कि जबरन शारीरिक संबंध बनाने से पीड़ित छात्रा के शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। ऐसे में वह सहानुभूति पाने का हकदार नहीं है।
गैंगरेप और डकैती में दो को 10 साल जेल
दिल्ली की विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बेगमपुर स्थित मंदिर में डकैती डालने और पुजारी की पत्नी से गैंगरेप में शिव विहार दिल्ली निवासी कृष पाल (40) व गांव नाहरमाटी सरधना, मेरठ (यूपी) निवासी रामदास उर्फ पप्पू (48) को दस साल कैद की सजा सुनाई है।
24 जुलाई को रोहिणी अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एमसी गुप्ता ने दोनों पर 35-35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
गौरतलब है कि बेगमपुर इलाके में 18 मार्च 2005 रात पुजारी मंदिर और उसकी पत्नी, बेटी व चार वर्षीय साला साथ वाले कमरे में सो रहे थे। करीब 1:00 बजे पिस्टल व अन्य हथियारों से लैस कृष पाल, कमल, वीरेंद्र, सुनील और राजपाल ताला तोड़कर मंदिर में घुस आए और पुजारी से एक लाख रुपये की मांग की।
पहले पीटा फिर पत्नी से किया गैंगरेप
रुपये न होने की बात पर बदमाशों ने उसकी पिटाई शुरू कर दी और उसे बांध दिया। इसके बाद बदमाशों ने कमरे में घुसकर पुजारी की पत्नी से जेवरात लूटने के बाद उससे सामूहिक दुष्कर्म किया।
आरोपियों ने खुद को झूठे मामले में फंसाने की दलील दी, लेकिन अभियोजन की गवाही व साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने कृष पाल और रामदास को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
इनके दो साथियों को वीरेंद्र और सुनील को अदालत पहले ही सजा सुना चुकी है, जबकि एक अन्य साथी राज पाल को भगोड़ा घोषित कर दिया था।