मामले में आरोपी युवक के परिजनों की ओर से दायर प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर पुलिस पर उन्हें प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। पीड़िता व आरोपी को कोर्ट ने पेश करने का निर्देश पुलिस को दिया था।
याची के वकील कमलेश कुमार मिश्रा ने कहा उनके मुवक्किल को सजा देना गलत है। जब दो किशोर अपनी इच्छा से शादी कर साथ रहना चाहते हैं तो क्या उन्हें सजा देना उचित है।
जब नाबालिग आरोपियों के संबंध में कानून में संशोधन कर उन्हें बालिग माना जा सकता है तो शादी करने वाले किशारों को बालिग क्यों नहीं माना जा सकता।
दिल्ली पुलिस के वकील राहुल मेहरा ने कहा मामले में लड़की नाबालिग है और शादी के लिये उसकी सहमति का कोई महत्व नहीं है। अगर वह गर्भपात करवाना चाहती है तो कानून इस पर विचार करना चाहिये।