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DRI अधिकारियों को रंगदारी मांगने के लिए समन जारी

Wed, 16 Jul 2014 10:31 AM IST
धीरज बेनीवाल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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नई दिल्ली में दस लाख रुपये की रंगदारी व मारपीट के आरोपियों ने डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस (डीआरआई) के दो अधिकारियों को बतौर आरोपी समन जारी किया है।
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एक शख्स ने शिकायत दायर कर अधिकारियों पर मारपीट करने और डरा धमका कर दस लाख रुपये मांगने और रुपये न देने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है।

तीस हजारी स्थित महानगर दंडाधिकारी डॉ. जगमिंदर सिंह ने डीआरआई के इंटेलीजेंस अफसर जीके सरकार व इंटेलीजेंस इंस्पेक्टर दीपक कुमार को बतौर आरोपी समन जारी पेश होने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह निर्देश शमीम अहमद की शिकायत पर जारी किया है।

अदालत ने शिकायत पर सुनवाई के बाद तीस जून को भारतीय दंड संहिता की धारा 323-मारपीट, 327-गलत मकसद के लिए मारपीट, 384-रंगदारी, 387-डरा धमका कर रंगदारी के तहत जीके सरकार व दीपक कुमार को समन जारी किया है।
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अदालत ने कहा कि आरोपियों को समन जारी करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं। आरोपों को साबित करने के शिकायतकर्ता ने सात गवाह व मेडिकल रिकॉर्ड, पीसीआर कॉल रिकॉर्ड अदालत में पेश किए।

पीड़ित शमीम अहमद ने अपनी शिकायत में कहा है कि वह दरियागंज स्थित आलजीन इलेक्ट्रॉनिक्स में काम करता था। शोरूम में डीआरआई ने छापा मारकर कुछ दस्तावेज व लैपटॉप जब्त किए थे। वह अपने मालिक के कहने पर 16 अक्तूबर 2009 को लैपटॉप आईपी एस्टेट स्थित डीआरआई के कार्यालय गया था।

पीड़ित का आरोप है कि कार्यालय में जीके सरकार ने उससे पूछा कि क्या वह दस लाख रुपये लाया है, जैसा कि उसके मालिक से बात हुई थी।

शमीम ने उन्हें बताया कि उसे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। यह सुनकर जीके सरकार ने शमीम को झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी और गाली गलौज की। इसके बाद जीके सरकार व दीपक कुमार ने उसे लात घूंसों से मारना पीटना शुरू कर दिया। अधिकारियों ने कहा कि अगर दस लाख रुपये नहीं मिले तो वह उसे जान से मार देंगे।

पीड़ित को पीटने के बाद अधिकारियों ने उससे मालिक सुमित गुप्ता के मोबाइल पर फोन करवाया। जब शमीम ने फोन मिलाया तो जीके सरकार ने उससे फोन छीन लिया और सुमित गुप्ता को धमकी देते हुए कहा कि अगर अगले दिन दो बजे तक पैसा नहीं मिला तो वह उन्हें मार देंगे।

डीआरआई अधिकारियों ने जब शमीम को छोड़ा तो उसने बाहर निकल पर पीसीआर को कॉल की। पुलिस ने एलएनजेपी अस्पताल ले गई जहां उसकी एमएलसी हुई। उसने इसकी शिकायत मध्य जिला पुलिस उपायुक्त को भी दी, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की।
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