दिल्ली के वसंत कुंज स्थित डीएलएफ प्रोमेनेड मॉल स्थित क्लब में मारपीट और कर्मचारियों पर हमला करने के मामले में पटियाला हाउस स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एसपी गर्ग ने बृहस्पतिवार को शराब व्यवसायी किशन लाल वाडिया के पोते पार्थ उसके दोस्त समीर खुराना, क्लब के प्रबंधक दीपक उप्पल और बाउंसर सुखविंद्र को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
इससे पहले पुलिस ने बताया कि चारों जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। 27 जून को हुई घटना के बाद पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की थी। एक में पार्थ और उसके साथियों को आरोपी बनाया गया था जबकि दूसरी में क्लब के बाउंसरों को आरोपी बनाया गया था।
अदालत ने वाडिया को बृहस्पतिवार तक इस आधार पर अंतरिम जमानत दी थी कि वह जांच में सहयोग करेगा और जांच अधिकारी द्वारा मांगी गई हर जानकारी देगा।
सुनवाई के दौरान वाडिया के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि उनके मुवक्किल ने जांच में पूरा सहयोग किया है और पुलिस द्वारा मांगी हर जानकारी दी है। अब उसे गिरफ्तार करने की कोई जरूरत नहीं है। अत: उसकी अग्रिम जमानत स्वीकार की जाए। वहीं मुख्य अभियोजन अधिकारी एसके दास ने कहा कि आरोपी ने जांच में सहयोग नहीं किया और उसे हिरासत में लेकर पूछताछ करनी है। पूरे घटनाक्रम की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध है और यह अहम साक्ष्य है।
वाडिया के अधिवक्ता ने उनके तर्क पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ की गई है। इसके अलावा चोट हमें आई है और हमने ही शिकायत की और पुलिस ने फर्जी तरीके से फंसा दिया।
पुलिस के अनुसार, घटना के बाद वाडिया व उसके दोस्तों के अलावा कई राजनीतिक के रिश्तेदार व उनके सुरक्षाकर्मियों की क्लब के बाउंसरों के बीच मारपीट हुई थी। वाडिया के सुरक्षाकर्मी ने रिवाल्वर निकालकर धमकाया व बाउंसरों को जान से मारने की धमकी दी।