नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण बिल्डरों से बकाया रकम वसूलने को एक हो गए हैं। तीनों प्राधिकरणों के सीईओ की अहम बैठक आज (मंगलवार) शाम चार बजे होगी, जिसमें फ्लैट खरीदारों को पजेशन दिलाने के साथ ही बकाया वसूलने पर रणनीति बनाई जाएगी।
दरअसल, 2008-09 में शासन से जारी आदेश पर 10 फीसदी रकम लेकर बिल्डरों को जमीन आवंटित कर दी गई। उस दौरान यह भी नहीं देखा गया कि बिल्डर की आर्थिक स्थिति क्या है। वह प्रोजेक्ट पूरा कर सकता है या नहीं। नोएडा फेज तीन, ग्रेटर नोएडा वेस्ट और यमुना प्राधिकरण में बड़ी संख्या में बिल्डरों को जमीन आवंटित कर दी गई है।
कई बिल्डर ऐसे हैं, जिन्होंने आवंटन राशि देकर जमीन ले ली। उसके बाद से किस्त नहीं दे सके। कुछ बिल्डर तीन-चार किस्त देने के बाद अटक गए। मौजूदा समय में एकाध को छोड़कर सभी बिल्डर प्राधिकरण की डिफॉल्ट की सूची में आ चुके हैं। वर्तमान समय में तीनों प्राधिकरणों की बिल्डरों पर कुल बकाया रकम ब्याज सहित करीब 15,000 करोड़ रुपये हो गई है।
दूसरी समस्या फ्लैट खरीदारों को पजेशन न दे पाने की है। बिल्डरों ने जमीन मिलते ही प्रोजेक्ट लांच कर दिए। खरीदारों ने फ्लैट बुक कराकर किस्त देनी शुरू कर दी। तीन साल में पजेशन देने का वादा करने वाले तमाम बिल्डर सात से आठ साल बीतने के बाद भी पजेशन नहीं दे पा रहे। कुछ बिल्डर तो दो-तीन साल से मौके पर काम भी नहीं कर रहे, जिससे लोग परेशान हैं।