दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र में राजधानी को क्राइम कैपिटल बताकर पुलिस को अपने अधीन करने का दिल्ली सरकार का संकल्प पास होने पर दिल्ली पुलिस ने आंकड़ों के साथ अपना पक्ष रखा है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कुछ सालों में दिल्ली में अपराधों में लगातार कमी आई है।
दिल्ली सरकार के सहयोग न करने के आरोप को भी पुलिस अधिकारियों ने पूरी तरह खारिज किया है। मुख्यमंत्री पर हुए हमलों में सफाई देते हुए पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सभी केसों की जांच बहुत प्रोफेशनल तरीके से कराई जा रही है। जांच बेहतर हो, इसके लिए हमलों के सभी केस क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिए गए हैं।
दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त पीआरओ अनिल मित्तल ने बताया कि कुछ सालों में राजधानी में अपराध तेजी से घटे हैं। जघन्य अपराधों में पिछले सालों के मुकाबले वर्ष 2016-17 में 20.76 फीसदी कमी आई। यह आंकड़ा 2017-18 में 11.46 रहा। डकैती 38.24 फीसदी तो लूटपाट 20.07 फीसदी कम हुईं। झपटमारी 21.56 फीसदी घटी। केस हल करने की बात की जाए तो 88.42 फीसदी जघन्य अपराध सुलझा लिए गए हैं। डकैती के 100 फीसदी, लूटपाट के 85.04 फीसदी और दुष्कर्म के 91.11 फीसदी मामलों को सुलझा लिया गया है। वरिष्ठ नागरिकों के साथ हुए 44.95 फीसदी केस सुलझा लिए गए हैं।
मित्तल ने बताया कि एस्मा के मामले में दिल्ली सरकार ने पुलिस पर सहयोग न करने का आरोप लगाया है, जो पूरी तरह गलत है। एस्मा के मामले में रिपोर्ट मिलने पर पूरी कार्रवाई की गई। मुख्यमंत्री पर हमले के मामले में भी पुलिस ने तुरंत आरोपियों के खिलाफ एक्शन लिया। दिल्ली सरकार का यह आरोप पूरी तरह गलत है कि यहां महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सुरक्षित नहीं हैं।