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खास वजह से लड़कियां हो रही घरेलू हिंसा का शिकार

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एक तरफ तो मेवात क्षेत्र लिंगानुपात में देश में अग्रणी हैं। कन्या वध का नाम तक नहीं लिया जाता। लेकिन मेवात में लड़कियों की कम तालीम की वजह से घरेलू हिंसा व दहेज प्रताड़ना के केसों की बढ़ोतरी हुई है।
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मेवात में लड़की की शादी के कुछ महीने बाद ही मामले कोर्ट-कचहरी तक पहुंच रहे हैं। लड़की कई महीने अपने घर पर बैठे रहने के बाद अंत में तलाक हो जाता है। जिससे मेवात में दिन-प्रतिदिन बेटियों की हो रही बेकद्री से मेवात का जन मानस गहरी सोच में पड़ गया हैं।

मेवात के बुद्धिजीवियों की मानें, तो मेवात में दहेज प्रताड़ना के मामलों को रोकने के लिए दोनों पक्षों को सैयम बरतना होगा। मामले कोर्ट कचहरी में निपटने से बेहतर है कि बिचौलिये के साथ मिल बैठकर रिश्तेदारी में ही निपटाए जाए।
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वहीं, दूसरी ओर मेवात में पश्चिमी सभ्यता की मार भी वैवाहिक रिश्तों पर भारी पड़ती नजर आ रही है। मोबाईल फोन से इस पर गहरा असर पड़ा है।
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बेटियों से बेटों से पीछे रखा जाता है

जिसका सामना करने के लिए बेटियों को शिक्षित करना ही एक मात्र लक्ष्य है। क्योंकि घरेलू हिंसा व दहेज प्रताड़ना से बचने के लिए महिलाओं को शिक्षा ही बचाएगी।

विधायक रहीस खान, जाकिर हुसैन, समाज सेवी एडवोकेट फकरूद्दीन चंदेनी, आलम उर्फ मुंडल, सरपंच अतर हुसैन रंगाला, प्रधान अर्जुनदेव चावला, सुरेंद्र शर्मा राठीवास, जाहिद हुसैन, रामसिंह गंडूरी, अशरफ वकील, मिंटू सिंह यादव, नूरूद्दीन नूर व सुरेंद्र माथुर का कहना है कि मेवात में बढ़ रहे घरेलू कलह, हिंसा व दहेज प्रताड़ना के मामलों से मेवात में खतरे की घंटी बजी हैं।

इसमें सबसे ज्यादा नुक्सान हमेशा ही लड़की का होता हैं। उन्होंने बताया कि मेवात में बेटी को बेटों की तरह माना गया है। लेकिन शिक्षा के मामले में बेटियों को बेटों से काफी पीछे रखा जाता है। जिस कारण वह आगे चलकर पिछड़ जाती हैं।

अगर मेवात में ऐसे मामलों को कम करना है, तो बेटियों को बेहतर शिक्षा देनी होगी। क्योंकि यहां घरेलू हिंसा व दहेज प्रताड़ना के ज्यादातर मामले अशिक्षित महिला के ही आते हैं।
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