जिस तरह ध्रुव ने एक-एक गेंद को बेहद नजदीक आकर उसे पहचानने के बाद खेला है, यह बहुत कम खिलाड़ी कर पाते हैं। जो बॉल जैसी आई उसे उसी तरह से प्लेड किया है। ध्रुव ने धैर्य से खेलते हुए बल्लेबाजी का आनंद लिया और बिना दबाव के खेला है। इसमें उन्होंने छोटे-छोटे लक्ष्य रखकर जो रन बनाए, वह भी तारीफ के काबिल है। खिलाड़ी तेजी से रन बनाने के चक्कर में मैदान पर ज्यादा देर तक नहीं टिक पाता है।
ध्रुव जुनूनी खिलाड़ी हैं और उनमें सीखने की ललक है। वह जिस बात की सोच लेते हैं उसे हर हाल में करने का प्रयास करते हैं। नए उभरते खिलाड़ियों के लिए यह जरूरी है कि वह सीखने की कोशिश करें। -अफजाल, कोच एस्टर एकेडमी, ध्रुव के कोच
दो दिन ध्रुव को अच्छी पारी खेलते हुए देख पूरा परिवार काफी खुश है। अब लगता है कि उनके लिए अभी तक जो मेहनत परिवार और खुद ध्रुव ने की है उसका फल मिलना शुरू हो गया है। -नेमसिंह, ध्रुव के पिता