गवाह की विश्वसनीयता कोर्ट के बाहर उसके बयानों के आधार पर तय नहीं की जा सकती है। यह बात अदालत ने निर्भया मामले में दोषी पवन गुप्ता के पिता की अर्जी पर सुनवाई करते हुए कही। दोषी के पिता ने अर्जी दायर कर निर्भया के मित्र पर पैसे लेकर मीडिया में बयान देने का आरोप लगाया है।
पटियाला हाउस अदालत के महानगर दंडाधिकारी सुधीर कुमार सिरोही ने कहा कि गवाह कोर्ट में शपथ लेकर अपना बयान दर्ज कराते हैं, वह अदालत के बाहर क्या कहते हैं, इससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े नहीं किए जा सकते। अदालत ने पवन के पिता से पूछा कि उनकी अर्जी में किस संज्ञेय अपराध का उल्लेख है? इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि 20 दिसंबर को मामले की अगली सुनवाई में अर्जी स्वीकार करने पर विचार किया जाएगा।
यह अर्जी हाल ही में निर्भया के चार दोषियों में से एक पवन के पिता हीरालाल गुप्ता ने दायर की थी। उन्होंने इस वारदात के समय निर्भया के साथ मौजूद उसके दोस्त एवं इस मामले के एकमात्र गवाह पर आरोप लगाया है कि उसने पैसे लेकर मीडिया से साक्षात्कार दिए हैं जिससे मामले की सुनवाई प्रभावित हुई है।
उल्लेखनीय है कि दोषियों की दया याचिका राष्ट्रपति के समक्ष विचाराधीन होने की बात कही जा रही है। वहीं दूसरी ओर दोषियों में से एक अक्षय ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की। एक अन्य दोषी विनय शर्मा ने अपनी दया याचिका वापस लेने की मांग की है। उसने दावा किया था कि याचिका पर उसके हस्ताक्षर नहीं है।
वसंत विवहार इलाके में 16 दिसंबर 2012 की रात 23 वर्षीय पैरा मेडिकल छात्रा के साथ चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म करने और हत्या करने के मामले में मुकेश, पवन, विनय और अक्षय को दोषी ठहराये जाने के बाद निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी जिस पर सुप्रीम कोर्ट तक मुहर लगा चुकी है। मामले में आरोपी रहे राम सिंह ने सुनवाई के दौरान ही तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी जबकि एक आरोपी नाबालिग था जिसे बालगृह में सजा काटने के बाद छोड़ दिया गया था।