आदेश में अदालत ने कहा, आरोपी या आवेदक की तरफ से गर्भपात और अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के गंभीर आरोप हैं। ये आरोप शिकायतकर्ता के बयान से बहुत स्पष्ट हैं। ऐसे में जमानत याचिका को स्वीकार करने का कोई आधार नहीं है। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के वकील ने आरोप लगाया कि आरोपी ने पीड़िता के चेहरे पर बीयर की बोतल फेंक कर और उसके शरीर पर सिगरेट दागकर उसे चोट पहुंचाई।
अतिरिक्त लोक अभियोजक ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए दावा किया कि घरेलू क्रूरता के अलावा आरोपी ने आईपीसी की धारा 377 और 313 के तहत अपराध किए हैं। एफआईआर के अनुसार, पीड़िता ने सितंबर 2021 में आरोपी से शादी की, जिसके बाद उसने उसके साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाए और दहेज की मांग की। साथ ही, जनवरी 2022 में उसने जबरन उसका गर्भपात करा दिया। इसमें कहा गया है कि पति ने उसके शरीर पर जलती हुई सिगरेट दागकर क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं।